डायरिया से जुड़ी कुछ भ्रांतियां भी हैं समाज में

डायरिया या दस्‍त लगना पेट की गड़बड़ी से जुड़ी एक आम समस्‍या है। यह बड़ी असहज स्थिति होती है, लेकिन अगर आप अपने खानपान पर ध्‍यान नहीं देंगे तो आपको यह समस्‍या होती रहेगी। आमतौर पर दस्‍त दो या तीन दिन में ठीक हो जाते हैं लेकिन कभी-कभी हालात खराब हो जाते हैं और डॉक्‍टरी देखरेख की जरूरत पड़ती है।
जब किसी को दस्‍त होने लगते हैं तो वह उनका इलाज करने के लिए उन तमाम तरीकों का इस्‍तेमाल करता है जिनकी उसे जानकारी होती है। कभी-कभी तो बड़े अजीबो-गरीब तरीकों और घरेलू नुस्‍खों का इस्‍तेमाल करके दस्‍त रोकने की कोशिश की जाती है। लेकिन डायरिया से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां और विश्‍वास समाज में प्रचलित हैं जो सच नहीं हैं। इसलिए जरूरी है कि इनके बारे में सभी को जागरूक किया जाए।
1. खूनी दस्‍त का मतलब कैंसर
यह सही है कि अगर मल में खून आए तो यह कैंसर की निशानी है। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। पेट के कई और रोग हैं जिनकी वजह से मल में खून आने लगता है। इसलिए अगर कभी खूनी दस्‍त हों तो घबराएं नहीं, पर साथ ही यह भी जरूरी है कि आप अपनी डॉक्‍टरी जांच जरूर कराएं।
2. दस्‍त खत्‍म होते ही आप काम पर वापस लौट सकते हैं
यह सही नहीं है। अगर आपको वायरस की वजह से पेट का इन्‍फेक्‍शन हुआ हो तो उसका असर अगले 48 घंटों तक रहता है। भले ही आपका बार-बार बाथरूम जाना रुक गया हो। इसलिए दस्‍त रुकने के बाद भी कुछ समय आराम करना जरूरी है।
3. कुछ न खाएं तो दस्‍त अपने आप रुक जाएंगे
बार-बार होने वाले दस्‍त में शरीर से पानी के साथ चीनी और नमक भी निकल जाता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि दस्‍त होने पर पानी, नमक, नीबू के साथ हल्‍का भोजन खाया जाए। ऐसा न करने पर शरीर कमजोर हो जाएगा और बच्‍चों व बुजुर्गों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।
4. दांत निकलने की वजह से होते हैं दस्‍त
माता-पिता सोचते हैं कि छोटे बच्‍चों में दांत निकलने की वजह से दस्‍त होते हैं। इस बात का कोई सबूत नहीं है। दांत निकलना और दस्‍त होना, ये दोनों घटनाएं एक साथ हो सकती हैं लेकिन दांत निकलने को दस्‍त की वजह नहीं माना जा सकता। इसलिए अगली बार आपके बच्‍चे को दस्‍त हो तो उसे डॉक्‍टर के पास जरूर ले जाएं।
5. केवल BRAT डायट खाने भर से हो जाएगा फायदा
दस्‍त में सिर्फ BRAT यानि ब्रेड, चावल, सेब और केले की डायट से डायरिया नहीं खत्‍म होगा। यह सही है कि इन चीजों को खाने से पेट में राहत रहती है पर इनमें सभी जरूरी तत्‍व मौजूद नहीं होते।
-एजेंसियां

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