श्रीकृष्ण के जीवन से हर समस्या का समाधान ढूंढा जा सकता है: मन की बात में मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी आज अपने दूसरे कार्यकाल में तीसरी बार रेडियो के जरिए लोगों से मुखातिब हुए तो बोले, ‘हर कोई श्रीकृष्ण के जीवन में से समस्याओं का समाधान ढूंढ सकता है। वह कभी रास में रम जाते थे तो कभी गायों के बीच तो कभी ग्वालों के बीच, कभी खेलकूद करना तो कभी बांसुरी बजाना, विविधितताओं से भरा यह व्यक्तित्व समाजशक्ति को समर्पित, लोकशक्ति को समर्पित, मित्रता कैसी हो तो सुदामा वाली घटना कौन भूल सकता है। युद्धभूमि में सारथी का काम स्वीकार कर लेना, कभी चट्टान तो कभी पत्तल उठाना का काम यानी हर चीज में नयापन महसूस होता है।
आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो मेरा दो मोहन की ओर ध्यान जाता है, एक सुदर्शनचक्रधारी मोहन और दूसरे चरखाधारी मोहन।’
‘यमुना और समुद्र तट’
पीएम ने कहा, ‘सुदर्शनचक्रधारी मोहन यमुना तट छोड़कर गुजरात में समुद्र तट पर स्थिर हुए और समुद्रतट पर पैदा हुए मोहन दिल्ली में यमुना किनारे आखिरी सांस लेते हैं। सुदर्शन चक्र धारी मोहन ने उस समय की स्थितियों में हजारों साल पहले युद्ध को टालने के लिए अपनी बुद्धि का अपने अपने सामर्थ्य का उपयोग किया था और चरखाधारी मोहन ने स्वतंत्रता के लिए, मानवीय मूल्यों के जतन के लिए, व्यक्तित्व के मूल तत्व को सामर्थ्य दे इसके लिए आजादी के जंग को ऐसा रूप दिया ऐसा मोड़ दिया जो पूरे विश्व के लिए अजूबा है। निस्वार्थ सेवा का महत्व हो, ज्ञान का महत्व हो या फिर जीवन में तमाम उतार चढ़ाव के बीच मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने का महत्व हो यह हम श्रीकृष्ण के संदेश से सीख सकते हैं इसलिए तो श्रीकृष्ण जगद्गुरु कहे जाते हैं।’
पीएम ने कहा कि इस बार 11 सितंबर से ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ की शुरुआत होगी। इसके साथ ही पीएम ने 29 अगस्त को ‘राष्ट्र खेल दिवस’ पर फिट इंडिया मूवमेंट लॉन्च करने की घोषणा की।
‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि इस बार 11 सितंबर से ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ की शुरुआत होगी। इसके साथ ही पीएम ने 29 अगस्त को ‘राष्ट्र खेल दिवस’ पर फिट इंडिया मूवमेंट लॉन्च करने की घोषणा की।
सेवा भाव से अटूट रिश्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी के सेवा भाव को लेकर कहा, ‘आज भारत एक और उत्सव की तैयारी में जुटा है, पूरी दुनिया में इसकी चर्चा है। मैं बात कर रहा हूं महात्मा गांधी की 150 जयंती। 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में एक व्यक्ति नहीं एक युग का जन्म हुआ था जिसने मानव इतिहास को नया मोड़ दिया। महात्मा गांधी के जीवन से एक बात हमेशा जुड़ी रही वह है, सेवा, सेवा भाव। उनका पूरा जीवन देखें, साउथ अफ्रीका में उन लोगों की सेवा की जो नस्लीय हिंसा का शिकार थे। उस समय यह छोटी बात नहीं थी। उन्होंने उन किसानों की सेवा कि जिनके साथ चंपारण में भेदभाव किया जा रहा था। उन्होंने उन मिल मजदूरों की सेवा कि जिन्हें उचित मजदूरी नहीं दी जा रही थी। उन्होंने गरीब, बेसहारा, कमजोर और भूखे लोगों की सेवा को अपने जीवन का परम कर्तव्य माना। सत्य के साथ गांधी का जितना अटूट नाता रहा है, सेवा के साथ भी उनका उतना ही अनन्य, अटूट नाता रहा। जिस किसी को जब भी जहां जरूरत पड़ी, महात्मा गांधी सेवा के लिए मौजूद रहे। उन्होंने न केवल सेवा पर बल दिया, बल्कि उसके साथ जुड़े आत्मसुख पर भी जोर दिया। सेवा शब्द की सार्थकता इसी अर्थ में है कि उसे आनंद के साथ किया जाए।’
सेवा की अपील
पीएम ने कहा, ‘मैं कह सकता हूं कि गांधी सेवा भाव से संगठन भाव को भी बल देते थे। समाज सेवा और समाज संगठन को हमें अपने व्यवहार में लाना है। यह उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। क्या गांधी 150 ऐसे ही आकर चला जाए, हमें मंजूर है क्या? जी नहीं, हम सब अपने आप से पूछें, चिंतन-मंथन करें, समाज में सभी लोगों के साथ मिलकर समाज के लिए क्या करें। एक व्यक्ति के नाते मैं उस प्रयासों में क्या जोड़ूं। सामूहिकता की एक ताकत होती है। इस गांधी 150 के कार्यक्रमों में सामूहिकता भी हो और सेवा भी हो। क्यों न पूरा मोहल्ला निकल पड़े। यदि हमारे फुटबॉल टीम है तो खेलने के साथ, लेकिन एकाध सेवा का काम भी करेंगे। लेडीज क्लब है, आधुनिक युग के लेडीज क्लब के जो काम हैं वो करेंगे लेकिन साथ में सभी सखियां एक सेवा कार्य करेंगी। बहुत कुछ कर सकते हैं। किताबें इकट्ठी करें पुरानी और गरीबों को बांटे। 130 करोड़ देशवासी हैं 130 करोड़ उपक्रम हो सकते हैं। कोई सीमा नहीं है। बस सदइच्छा हो, सदभाव और पूर्ण समपर्ण भाव की सेवा हो।’
गांधी से जुड़े स्थानों पर जाएं
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘कुछ महीने पहले मैं गुजरात में दांड़ी गया था। आजादी के आंदोलन में नमक सत्याग्रह, दांड़ी एक टर्निंग पॉइंट है। वहां मैंने महात्मा गांधी को समर्पित अति आधुनिक एक म्यूजियम का उद्घाटन किया था। मेरा आपसे आग्रह है कि आप भी महात्मा गांधी से जुड़ी किसी स्थान की यात्रा जरूर करें। पोरबंदर हो, साबरमती आश्रम हो, वर्धा आश्रम हो या दिल्ली में महात्मा गांधी से जुड़े स्थान हों, और जब भी आप वहां जाएं तो वहां की तस्वीर सोशल मीडिया पर भी डालें।’
स्वच्छता ही सेवा अभियान
पीएम ने कहा, ‘पिछले कुछ सालों में हम 2 अक्टूबर से पहले लगभग 2 सप्ताह तक देशभर में ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ चलाते हैं। इस बार से ये 11 सितंबर से शुरू होगा। इस दौरन हम अपने-अपने घरों से बाहर निकलकर श्रमदान के जरिए महात्मा गांधी को कर्यांजलि देंगे। घर हो या गलियां, चौक-चौराहे हो या नालियां, स्कूल, कॉलेज से लेकर सभी सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता का महाअभियान चलाना है। इस बार प्लास्टिक पर विशेष जोर देना है। 15 अगस्त को लाल किले से मैंने ये कहा कि जिस उत्साह व ऊर्जा के साथ सवा सौ करोड़ देशवासियों ने स्वच्छता के लिए अभियान चलाया, खुले में शौच से मुक्ति के लिए कार्य किया, उसी प्रकार हमें साथ मिलकर सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को खत्म करना है। कई व्यापारी भाइयों-बहनों ने दुकान में एक तख्ती लगा दी है, जिस पर लिखा है कि ग्राहक अपना थैला साथ लेकर आएं। इससे पैसा भी बचेगा और पर्यावरण की रक्षा में वे अपना योगदान भी दे पाएंगे। इस बार 2 अक्टूबर को जब बापू की 150वीं जयंती मनाएंगे तो इस अवसर हम उन्हें न केवल खुले में शौच से मुक्त भारत समर्पित करेंगे, बल्कि उस दिन पूरे देश में प्लास्टिक के खिलाफ एक नए जन आंदोलन की नींव रखेंगे।’
प्लास्टिक से मुक्ति
मोदी ने प्लास्टिक से मुक्ति का संकल्प दोहराते हुए कहा, ‘2 अक्टूबर विशेष दिवस के रूप में मनाएं। महात्मा गांधी जयंती का दिन एक विशेष श्रमदान का उत्सव बन जाए। देश की सभी नगरपालिका, नगरनिगम, जिला-प्रशासन, ग्राम-पंचायत, सरकारी-गैरसरकारी सभी व्यवस्थाएं, सभी संगठन, एक-एक नागरिक हर किसी से मेरा अनुरोध है कि प्लास्टिक कचरे के कलेक्शन और स्टोरेज के लिए उचित व्यवस्था हो। मैं कॉर्पोरेट सेक्टर से भी अपील करता हूं कि जब ये सारा प्लास्टिक वेस्ट इकठ्ठा हो जाए तो इसके उचित निस्तारण हेतु आगे आएं, डिस्पोजल की व्यवस्था हो। इसे रिसाइकल किया जा सकता है। इसे ईंधन बनाया जा सकता है। इस प्रकार इस दिवाली तक हम इस प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निपटारे का भी कार्य पूरा कर सकते हैं। बस संकल्प चाहिए। प्रेरणा के लिए इधर-उधर देखने की जरूरत नहीं है, गांधी से बड़ी प्रेरणा क्या हो सकती है।’
कुपोषण से लड़ाई
पीएम ने कहा, ‘हमारी संस्कृति में अन्न की बहुत अधिक महिमा रही है। यहां तक कि हमने अन्न के ज्ञान को भी विज्ञान में बदल दिया है। संतुलित और पोषक भोजन हम सभी के लिए जरूरी है। विशेष रूप से महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए, क्योंकि ये ही हमारे समाज के भविष्य की नींव है। ‘पोषण अभियान’ के अंतर्गत पूरे देशभर में आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से पोषण को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। लोग नए और दिलचस्प तरीकों से कुपोषण से लड़ाई लड़ रहे हैं।’
टाइगर की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य समय से पहले हासिल
पीएम ने कहा, ‘भारत में पर्यावरण की केयर और चिंता यानि देखभाल की चिंता स्वाभाविक नजर आ रही है। पिछले महीने मुझे देश में टाइगर सेंसस जारी करने का सौभाग्य मिला था। क्या आप जानते हैं कि भारत में कितने बाघ हैं? भारत में बाघों की आबादी 2967 है। कुछ साल पहले इससे आधे भी बड़ी मुश्किल से थे हम। बाघों को लेकर 2010 में रूस में टाइगर समिट हुआ था। इसमें दुनिया में बाघों की घटती संख्या को लेकर चिंता जाहिर करते हुए एक संकल्प लिया गया था। यह संकल्प था 2022 तक पूरी दुनिया में बाघों की संख्या को दोगुना करना। लेकिन यह न्यू इंडिया है, हम लक्ष्यों को जल्दी से जल्द पूरा करते हैं। हमने 2019 में ही अपने यहां टाइगर की संख्या दोगुनी कर दी।’
29 अगस्त से फिट इंडिया मूवमेंट
मोदी ने कहा, ’29 अगस्त को ‘राष्ट्र खेल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है । इस अवसर पर हम देश भर में ‘FIT INDIA MOVEMENT’ लॉन्च करने वाले हैं। खुद को फिट रखना है । देश को फिट बनाना है। हर एक के लिए बच्चे, बुजुर्ग, युवा, महिला सब के लिए ये बड़ा दिलचस्प अभियान होगा और ये आपका अपना होगा। लेकिन उसकी बारीकियां आज मैं बताने नहीं जा रहा हूं। 29 अगस्त का इंतजार कीजिए। मैं खुद उस दिन विस्तार से विषय में बताने वाला हूं और आपको जोड़े बिना रहने वाला नहीं हूं।’
-एजेंसियां

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