सूर्य ग्रहण कल, धनु राशि में 559 साल बाद बनेगा 6 ग्रहों का दुर्लभ योग

नई दिल्ली। कल गुरुवार 26 दिसंबर 2019 की सुबह सूर्य ग्रहण शुरू हो जाएगा जोक‍ि एशिया के कुछ देश, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा।

भारत में अधिकतम स्थानों पर खंडग्रास सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई देगा। दक्षिण भारत की कुछ जगहों पर कंकणाकृति सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

भारत में ग्रहण काल 2.52 घंटे का रहेगा। सुबह 8.04 बजे से ग्रहण शुरू होगा, 9.30 बजे मध्य काल और सुबह 10.56 बजे ग्रहण खत्म होगा। जब सूर्य ग्रहण होगा, तब धनु राशि में एक साथ 6 ग्रह स्थित रहेंगे। इस दिन पौष मास की अमावस्या तिथि रहेगी। ग्रहण के बाद पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है।

ये ग्रहण मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, चेन्नई, मैसूर, कन्याकुमारी सहित भारत के कई अन्य शहरों में भी दिखाई देगा। इसके बाद अगला सूर्य ग्रहण 21, जून 2020 को होगा, ये भारत में दिखाई देगा। 26 दिसंबर के सूर्य ग्रहण के बाद एक राशि में 6 ग्रहों के साथ सूर्य ग्रहण का योग 559 साल बाद सन 2578 में बनेगा।

ज्योत‍िषीय व‍िद्वान बताते हैं कि ऐसा दुर्लभ सूर्यग्रहण 296 साल पहले 7 जनवरी 1723 को हुआ था। उसके बाद ग्रह-नक्षत्रों की वैसी ही स्थिति 26 दिसंबर को रहेगी। इस दिन मूल नक्षत्र और वृद्धि योग में सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। 296 साल बाद दुर्लभ योग बन रहे हैं। इस दिन मूल नक्षत्र में 4 ग्रह रहेंगे। वहीं, धनु राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध, बृहस्पति, शनि और केतु रहेंगे। इन 6 ग्रहों पर राहु की पूर्ण दृष्टि भी रहेगी। इनमें 2 ग्रह यानी बुध और गुरु अस्त रहेंगे। इन ग्रहों के एक राशि पहले (वृश्चिक में) मंगल और एक राशि आगे (मकर में) शुक्र स्थित है।

अब 26 दिसंबर को धनु राशि में 6 ग्रहों की युति के साथ सूर्य ग्रहण होने जा रहा है, ये योग 296 साल बाद बना है। गुरुवार को सूर्य, बुध, गुरु, शनि, चंद्र और केतु धनु राशि में रहेंगे। राहु की दृष्टि रहेगी, मंगल वृश्चिक में और शुक्र मकर राशि में रहेगा। इस तरह का सूर्य ग्रहण 7 जनवरी 1723 को 296 साल पहले बना था। अब ऐसा योग 559 साल बाद 9/1/2578 को बनेगा। उस समय सूर्य, बुध, गुरु, शनि, चंद्र और केतु धनु राशि में रहेंगे, राहु की दृष्टि के साथ सूर्य ग्रहण होगा।

इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण मूल नक्षत्र और धनु राशि में होगा। ग्रहण के समय सूर्य, बुध, गुरु, शनि, चंद्र और केतु धनु राशि में एक साथ रहेंगे। केतु के स्वामित्व वाले नक्षत्र मूल में ग्रहण होगा और नवांश या मूल कुंडली में किसी प्रकार का अनिष्ट योग नहीं होने से प्रकृति को नुकसान की संभावना नहीं है। इस बार सूर्य ग्रहण से पहले चंद्र ग्रहण नहीं हुआ है और आगे भी चंद्र ग्रहण नहीं होने से प्रकृति को बड़े नुकसान की संभावना नहीं है। ग्रहण का प्रभाव मूल नक्षत्र और धनु राशि वालों पर ज्यादा रहेगा।

सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पूर्व से माना जाता है। 25 दिसंबर की रात 8 बजे से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो ग्रहण के मोक्ष के बाद समाप्त होगा। इसके बाद घर में और मंदिरों में साफ-सफाई करने की और पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है।

– Legend News

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