कोरोना से बचाव में सेनेटाइजर से अधिक कारगर साबुन: डॉ. ज्ञानेन्द्र

मथुरा। कोरोना संक्रमण से बचाव में सेनेटाइजर से कहीं अधिक कारगर है साबुन। साबुन में सेनेटाइजर के मुकाबले वायरस में मौजूद लिपिड को तेजी से मारने की क्षमता होती है। साबुन में फैटी एसिड साल्ट पाया जाता है जिसे सर्फेक्टेंट भी कहते हैं, यह वायरस की बाहरी परत को पूरी तरह से निष्क्रिय कर देता है जिससे संक्रमित होने का खतरा पूरी तरह से समाप्त हो जाता है, यह बातें Rajiv Academy for Pharmacy के निदेशक डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार शर्मा ने छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन चर्चा में बताईं।

डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार शर्मा ने फार्मेसी के छात्र-छात्राओं को साबुन या सेनेटाइजर कोरोना वायरस से बचने के लिए क्या है बेहतर विकल्प पर चर्चा करते हुए कहा कि विशेषज्ञ मानते हैं कि अपने हाथों को समय-समय पर साबुन से धोकर या हैण्ड सेनेटाइजर का इस्तेमाल कर वायरस के खतरे को कम किया जा सकता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि यदि कोरोना वायरस से बचना है तो आपको सेनेटाइजर की जगह साबुन का अधिकाधिक इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने छात्र-छात्राओं को मास्क और दस्ताने पहनकर ही घर से बाहर निकलने की भी सलाह दी।

डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि सेनेटाइजर का सही तरह से इस्तेमाल करने से ही वायरस को मारा जा सकता है लेकिन सेनेटाइजर को लोग सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की एक शोध के अनुसार सेनेटाइजर कोरोना वायरस से लड़ने में साबुन जितना कारगर नहीं है। विशेषज्ञों के शोध से पता चलता है कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वही सेनेटाइजर काम करेगा जिसमें अल्कोहल की मात्रा अधिक होगी।

आर.के. एज्यूकेशन हब के चेयरमैन डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि कोरोना संक्रमण की अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है, ऐसे में हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह स्वयं को सुरक्षित रखे। डॉ. अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे जीवन को खतरे में न डालते हुए पठन-पाठन करें, बहुत जरूरी हो तभी बाहर निकलें। संस्थान के प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने कहा कि उच्च शैक्षिक संस्थानों के प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं का यह दायित्व है कि वे समाज को कोरोना संक्रमण से बचाव और इसके दुष्परिणामों से अवगत कराएं।

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