तो कांग्रेसी मुख्‍यमंत्री के बेटे रंजन गोगोई को भी राम जन्मभूमि मुद्दे से हट जाना चाहिए: वेदांती

नई दिल्‍ली। राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास वेदान्ती ने राम जन्मभूमि मुद्दे पर तारीख बढ़ाने की वजह को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जस्टिस यू यू ललित पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के वकील थे सिर्फ इस वजह से वकील राजीव धवन ने मुख्य न्यायाधीश से उन्हें बेंच से हटाने का अनुरोध किया।
अगर ऐसा है तो मैं सीधा आरोप लगाता हूं कि वर्तमान मुख्य न्यायाधीश असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के पुत्र है। उन्हें भी मामले से अपना नाम वापस ले लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जानबूझकर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, राहुल गांधी व सोनिया गांधी के कहने पर केस को लटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 100 करोड़ हिंदुओं की मांग है कि मुख्य न्यायाधीश अपना नाम वापस लें और किसी अन्य जज को नियुक्त करें। ये हिंदुओं के साथ षड्यंत्र किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मैं फिर से जज महोदय से निवेदन करता हूं कि इस मामले की हर रोज सुनवाई हो। अगर यू यू ललित ने अपना नाम वापस ले लिया तो कांग्रेसी मुख्यमंत्री के बेटे वर्तमान मुख्य न्यायाधीश को भी अपना नाम वापस ले लेना चाहिए और मामले की हर रोज सुनवाई कर निर्णय देना चाहिए।
उधर, सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामजन्मभूमि मामले पर सुनवाई के लिए फिर से 29 जनवरी की तारीख दिए जाने पर विश्व हिंदू परिषद व राम जन्मभूमि न्यास ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि भगवान श्री राम की जन्मभूमि पर हर हाल में मंदिर का निर्माण होगा। दुनिया की कोई ताकत श्री राम की जन्म भूमि को उनसे नहीं छीन सकती।
इससे पता चलता है कि कांग्रेस की मंशा क्या है…
विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करने वाली कांग्रेस और बाबरी के समर्थक मामले को लगातार लटकाए रखना चाहते हैं। विहिप प्रवक्ता ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए हिंदू समाज न्याय की प्रतीक्षा करता आ रहा है। सत्र न्यायालय से चला मामला अब सुप्रीम कोर्ट में भी तारीख पर तारीख मिलने के कारण प्रभावित हो रहा है। आखिर कब तक भगवान श्री राम लला कपड़े के मंदिर में गर्मी बरसात और ठंड से पीड़ित होते रहेंगे? उन्होंने कहा कि हमारा विश्वास है कि अयोध्या में भव्य राममंदिर जरूर बनेगा।
नृत्यगोपाल दास बोले, उद्वेलित हो सकते हैं हिंदू
श्री राम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष और मणिराम दास छावनी महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि देश का हर नागरिक सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करता है लेकिन वर्तमान में न्यायिक व्यवस्था में गतिरोध हिंदू समाज को दुख पहुंचा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि के विवाद में न्याय की प्रतीक्षा लगाए हुए हिंदू समाज बहुत ही आहत है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हिंदू समाज की भावनाओं का आदर करें। लगातार इस प्रकार से न्यायिक प्रक्रिया में गतिरोध हिंदू समाज को उद्वेलित कर सकता है। कोर्ट में अरोधक बन रहे कांग्रेसी नहीं चाहते कि मामले का समाधान हो और हिंदू समाज को न्याय मिले।
गौरतलब है कि पूर्व में कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल ने जिस प्रकार से इस मामले में अवरोध उत्पन्न किया और आज वकील राजीव धवन द्वारा इस मामले में जो उंगली उठाई गई उससे पता चलता है कि कांग्रेस की मंशा क्या है?
कांग्रेस नहीं चाहती कि मामले का शीघ्र समाधान हो इसलिए सुन्नी वक्फ बोर्ड के कंधे पर सवार होकर लगातार रामलला को पीड़ित कर रही है।
उन्होंने कहा कि हिन्दुओं की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट भगवान श्रीराम की पीड़ा को समझे और साथ ही हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए नियमित सुनवाई का मार्ग प्रशस्त करे।
‘साधु संत धर्मसंसद में विचार करते हुए लेने ठोस निर्णय’
विहिप प्रवक्ता ने कहा, प्रयागराज में आयोजित कुंभ के दौरान 31 जनवरी और 1 फरवरी को साधु संतों की ‘धर्म संसद’ में सुप्रीम कोर्ट में चल रही न्यायिक प्रक्रियाओं के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए वक्तव्य पर विचार करते हुए ठोस निर्णय लेंगे।
इसके अलावा सनकादिक आश्रम के महंत व संत समिति के अध्यक्ष कन्हैया दास ने कहा कि श्री राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण होकर रहेगा। यह मुस्लिम पक्षकार भलीभांति समझ रहे हैं इसलिए वह न्यायालय में किसी न किसी बहाने अवरोध डालने का काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट से इस देश के नागरिकों को बहुत आशाएं हैं लेकिन बार-बार तारीख बढ़ने से निराशा हो रही है।
-एजेंसियां

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