ज्यादातर मानसिक परेशानियों का नतीजा होता है स्लीप डिसॉर्डर

स्लीप डिसॉर्डर ज्यादातर मानसिक परेशानियों का नतीजा होता है। ज्यादातर लोग नींद को आलस से जोड़ कर देखते हैं, जबकि यह हमारे शरीर के लिए दवा जैसी होती है। इसका सही डोज शरीर को फिट रखता है तो कम डोज सेहत बिगाड़ सकता है। इसके नतीजे के तौर पर डाइबिटीज और मोटापा आपके शरीर में घर कर सकता है।
स्लीप डिसॉर्डर का असर
इसका असर तो बहुत बड़े स्तर पर होता है, पर शुरुआती प्रभावों की बात करें तो सबसे पहले आंखों के नीचे डार्क सर्कल हो जाते हैं। फिर एकाग्रता में कमी आती है तो निर्णय लेने की क्षमता भी कम होती है। इसके अलावा थका-थका रहना भी नींद पूरी ना होने की निशानी है। क्लिनिकल सायकोलॉजिस्ट डॉ. आराधना गुप्ता कहती हैं कि ज्यादा समय तक नींद ना पूरी होने का नतीजा डाइबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा भी होता है। बेहद कब्ज रहना भी इसके असर का ही परिणाम होता है। स्लीप डिसॉर्डर की वजह से याददाश्त भी कमजोर होती है। डॉ. आराधना मानती हैं कि स्लीप डिसॉर्डर के 60 प्रतिशत मामले एंग्जाइटी डिसॉर्डर की वजह से होते हैं। एंग्जाइटी यानि तरह-तरह की चिंताएं।
स्लीप डिसॉर्डर के कई लक्षण
स्लीप डिसॉर्डर है तो इसके लक्षण कई तरह से सामने आते हैं। जैसे बिस्तर पर जाने के काफी देर बाद नींद आना, दिन में नींद के झटके आते रहना, बार-बार नींद का टूटना, रात में बार-बार उठना, खर्राटे लेना, रातों में टांगों का छटपटाना, नींद में बोलना, चलना, हरकतें करना आदि।
साधारण दिखते असाधारण कारण
चिंता इसका सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा परेशानी के बारे में सोचते रहने और मानसिक असुरक्षा नींद से नाता तोड़ने की बड़ी वजह बनते हैं।
डॉ. आराधना कहती हैं कि हिडेन स्ट्रेस यानी छुपा हुआ तनाव भी नींद में खलल डालने का बड़ा काम करता है। इसको एक उदाहरण के तौर पर समझना होगा।
मान लीजिए कि आपके पर्स में 2000 के 10 नोट हैं, आप मार्केट गईं और 8 नोट खर्च कर दिए। फिर घर आकर आपने नोट गिने तो अब आपके पास सिर्फ 4000 रुपए ही थे। आपको अचानक से बढ़ते खर्च की चिंता हुई। पर फिर आपने खुद को समझाया कि खरीदादी करेंगे तो खर्चा होगा ही। पर यह चिंता आपके दिल में कहीं घर कर गई। इसे ही हिडेन स्ट्रेस कहते हैं।
वजहें और भी हैं
-देर से खाना खाना।
-अकेलापन।
– घंटों भूखे रहना।
-इंटरनेट, टीवी का ज्यादा इस्तेमाल।
-चाय और कॉफी का ज्यादा सेवन।
-दिन भर कुछ भी ना करना।
-शराब, सिगरेट की लत होना।
राहत के उपाय
कागज पर लिखें : सोने जाने से पहले अपनी चिंता को कागज पर लिख लें। उसका हल भी लिखें। यह भी लिखें कि इसे कल कैसे हल करेंगे।
सोने के तीन घंटे पहले लें दवा : कई दवाएं ऐसी होती हैं,जिनको खाने के बाद नींद उड़ सी जाती है। कुछ एंटी एलर्जिक दवाएं खास तौर पर ऐसा करती हैं इसलिए कोशिश करें कि सोने से पहले वाला डोज सोने से करीब तीन घंटे पहले खा लें, ताकि नींद पर इसका असर ना होने पाए।
सोने से पहले मीठे को कहें ना: सोने के कम से कम दो घंटे पहले खाना जरूर खा लें। सोने के ठीक पहले मीठा खाने से परहेज करें।
सफेद कैनवस पर करें ध्यान केन्‍द्रित : अपने सोने के कमरे में ओम लिखा हुआ पोस्टर लगाएं। अब इस पर सोने के 15 मिनट पहले से ध्यान केन्‍द्रित करें। इसके अलावा सफेद या हल्के नीले कैनवस पर भी ध्यान लगाया जा सकता है। इससे मन शांत होगा और नींद आएगी।
सिरकेडियन रिदम स्लीप डिसॉर्डर
मनोचिकित्सक डॉ. स्मिता श्रीवास्तव कहती हैं कि सोने के समय जागना और जागने के समय सोना इससे पीड़ित व्यक्ति की आदत बन जाती है। ऐसा अकसर लम्बे रूट की गाड़ियों के ड्राइवरों, ट्रक ड्राइवरों, विमान चालकों, रात की शिफ्ट में काम करने वाली नर्सेज, बीपीओ में काम करने वाले कर्मचारियों में होता है। असर तब पता चलता है, जब काम पर ना होने के बाद भी ये लोग सोने के समय पर नहीं सो पाते।
डीलेड स्लीप फेज सिंड्रोम
इसमें व्यक्ति को कुछ घंटे देर से उठने की आदत हो जाती है। धीरे-धीरे शरीर उसी के हिसाब से चलता रहता है। इस समस्या के निवारण के लिए अपने सोने के समय को निश्चित कर सकते हैं, दिन में सोने से बच सकते हैं और टीवी देखने की लत से बच सकते हैं।
स्लीप एप्निया
डॉ. श्रीवास्तव कहती हैं, दरअसल स्लीप एप्निया के शिकार लोग सोते वक्त सांस लेने में दिक्कत महसूस करते हैं और इस वजह से सो नहीं पाते। कई बार इसकी वजह गले का मांस बढ़ जाना भी होता है।
इनसोमनिया
इनसोमनिया की स्थिति तब मानी जाती है, जब नींद न आने की समस्या लम्बे समय तक रहे। परेशानी दो से तीन सप्ताह के लिए या महीनों तक रह सकती है।
हाइपरसोमनिया
हाइपरसोमनिया इनसोमनिया के उलट होता है। ऐसे लोगों को हर थोड़े समय के बाद नींद आती है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
-बिस्तर पर जाने के 15 मिनट तक नींद न आए तो तुरंत बिस्तर छोड़ दें और खुद को कुछ देर के लिए अन्य कामों में व्यस्त रखें।
-बिस्तर का इस्तेमाल सिर्फ सोने के लिए करें यानी अखबार पढ़ने, खाना खाने जैसे काम बिस्तर से एकदम अलग करें।
-गरिष्ठ खान-पान नींद न आने की स्थिति में भी परेशान करता है और ज्यादा आने की स्थिति में भी। इसलिए इससे बचें।
-कॉफीयुक्त वस्तुओं और एल्कोहल से परहेज करें।
ये उपाय भी हैं कारगर
-सोने से पहले गर्म दूध में एक चुटकी जायफल का पाउडर मिलाकर पीना फायदेमंद है। जायफल को घी में घिसकर सोते समय पलकों पर लगाने से नींद जल्दी आ जाएगी।
-एक चम्मच जीरे का पाउडर पके केले में लगाकर खाने से नींद जल्दी आती है।
-सोने से पहले गर्म दूध में केसर के कुछ रेशे मिलाकर पीने से अनिद्रा से छुटकारा मिलता है।
-एजेंसी