सिंगापुर: बंद कमरे में मिले पीएम मोदी और जिम मैटिस, चाइना सी विवाद रहा अहम मुद्दा

सिंगापुर में पीएम मोदी और अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस की बंद कमरे में मुलाकात भी हुई है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में साझा हितों, वैश्विक चिंताओं और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा हुई है। इन दोनों देशों के लिए जाहिर तौर पर साउथ चाइना सी विवाद भी अहम मुद्दा है।
आपको बता दें कि पीएम मोदी और अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस, दोनों ने ही वार्षिक शांगरी-ला वार्ता को संबोधित किया है। हालांकि दोनों की मुलाकात शांगरी-ला वार्ता के इतर संपन्न हुई। मैटिस ने इस उच्च स्तरीय सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा है कि पेइचिंग ने समूचे दक्षिण चीन सागर में जहाज रोधी मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और इलेक्ट्रॉनिक जैमर सहित कई मिलिटरी साजो-सामान तैनात किए हैं। चीन यहां अत्याधुनिक सैन्य सुविधाओं से लैस कृत्रिम द्वीप और ढांचों का निर्माण भी कर रहा है।
चीन ने इसके अलावा पारासेल द्वीप के जंगलों में भारी बमवर्षक भी तैनात किये हैं। मैटिस ने शांगरी-ला वार्ता के दौरान कहा कि चीन के विपरीत दावों के बावजूद हथियारों की तैनाती धौंस जमाने और धमकाने के लिए सैन्य इस्तेमाल के उद्देश्यों से ही की जा रही है। मैटिस के इन दावों और सीधे चीन पर हमलावर होने की कोशिशों के दौरान पीएम मोदी से भी उनकी अहम मुलाकात हुई है।
अमेरिकी सेना में भारत की महत्ता के बड़े सांकेतिक कदम के तौर पर पेंटागन द्वारा प्रशांत कमान का नाम बदलकर हिंद-प्रशांत कमान किए जाने के कुछ दिनों बाद यह मुलाकात हुई।
सूत्रों ने बताया कि तीन देशों की यात्रा के आखिरी चरण में मोदी ने बंद कमरे में मैटिस से मुलाकात की जिसमें दोनों पक्षों ने आपसी और वैश्विक हितों के सभी सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की।
इस मुलाकात से पहले शांगरी-ला वार्ता में पीएम मोदी खुद प्रतिद्वंद्विता वाले एशिया के बजाय सहयोग वाले एशिया पर जोर दे चुके हैं। मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि प्रतिद्वंद्विता के एशिया से क्षेत्र पिछड़ जाएगा जबकि सहयोग वाले एशिया से शताब्दी का स्वरूप तय होगा। उन्होंने कहा कि जब भारत और चीन एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशील रहते हुए भरोसे और विश्वास के साथ काम करते हैं तभी एशिया और दुनिया को बेहतर भविष्य मिलेगा।
मैटिस ने भी अपने संबोधन में कहा था कि दोनों देशों को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक-साथ और अन्य देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
मैटिस ने कहा, ‘यह उचित है कि समुद्री मार्ग सभी देशों के लिए खुले रहें।’
गौरतलब है कि अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर के सैन्यीकणरण पर चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपनी सबसे पुरानी और बड़ी सैन्य कमान प्रशांत कमान का नाम बदलकर हिंद-प्रशांत कमान कर दिया है।
अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में चीन के कदमों से बढ़े तनाव के मद्देनजर यह कदम उठाया।
चीन, दक्षिण चीन सागर के लगभग सभी हिस्सों पर अपना दावा करता है। वियतनाम, फिलीपीन, मलयेशिया, ब्रूनेई और ताइवान उसके इस दावे को खारिज करते हैं। अमेरिका भी इलाके में चीन के दावों को खारिज करता है। पेंटागन का कदम अमेरिका की कूटनीतिक सोच में भारत की बढ़ती महत्ता को भी दर्शाता है।
-एजेंसी

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