स‍िंधी-बलूचों को अब स‍िर्फ पीएम मोदी से उम्मीद, वे यूएन में उठाएं हमारी बात: Sufi Laghari

इस्लामाबाद। मानवाधिकार परिषद के 42 वें सत्र के दौरान पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सम्मेलन में बोलते हुए, सिंधी फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक मुनव्वर Sufi Laghari ने कहा क‍ि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे जुल्मों के ख‍िलाफ प्रधानमंत्री मोदी से ही हमें आशा है क‍ि वे यूएन में हमारे बात कह सकते हैं, हम उनकी तरफ बड़ी आशा से देखते हैं।

पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने एक कार्यक्रम आयोज‍ित क‍िया ज‍िसमें मांग की है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सिंध, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले मानवाधिकार उल्लंघन का मामला संयुक्त राष्ट्र में उठाया जाया।

मानवाध‍िकारों को कुचले जाने पर इकठ्ठा हुए स‍िंधी, बलूच सह‍ित अन्य प्रांतों के नागर‍िकों के साथ ही पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के कार्यकर्ताओं ने भी नरेंद्र मोदी से इसी तरह की मांग रखी है।

एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिका में सिंधी फाउंडेशन के निदेशक Sufi Laghari ने कहा कि सिंध में परेशानी यह है कि वहां लोगों में डर है और सबसे कठिन चुनौती उस डर को दूर करना है। इसे सिंध के अंदर से दूर नहीं किया जा सकता है इसलिए एकमात्र आशा बाहर के मुल्कों से है।

उन्होंने आगे कहा कि मैं सुझाव दूंगा कि जब पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र में आएंगे तो उन्हें सिंध के बारे में बात करनी चाहिए क्योंकि भारत को इसका नाम सिंध से मिला था और सिंधियों के बहुत से लोग भारत में रह रहे हैं। लगहरी ने कहा कि कम से कम वह मानव अधिकारों के बारे में बात कर सकते हैं, वह सिंध में धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बात कर सकते हैं।

इस कार्यक्रम में पीओके, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। बलूचिस्तान के मानवाधिकार आयोग के प्रमुख ताज बलूच ने कहा कि बलूचिस्तान में स्थितियां लगातार खराब हो रहा है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय हमारे ऊपर किए जा रहे अत्याचारों पर चुप्पी साधे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि पहले प्रांत में सिर्फ किडनैपिंग होती थी। फिर मारो और गायब करो की शुरुआत हुई और अब गांवों को जलाने का काम किया जा रहा है। इसे नरसंहार कहते हैं। आयोग के प्रमुख ने आगे कहा कि यूएन और मानवाधिकार संस्थानों को बलूचिस्तान में आ कर यहां किए जा रहे अत्याचारों की जांच करनी चाहिए। उन्हें पाक सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को रोकना होगा।

वही, इस कार्यक्रम में अफगानिस्तान से पत्रकार बिलाल सरवरी भी भाग लेने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में पाक की भूमिका एक विनाशकारी देश की हैं। 2001 में तालिबान को सरकार से हटाने के बाद हमारे पास नया सफर शुरू करने का मौका था।

लेकिन पाकिस्तान ने अपनी छवि सड़क किनारे बम लागने वाले और आत्मघाती हमलों को अंजाम देने वाले राष्ट्र के रूप में बनाई। सरवरी ने बताया कि अफगानिस्तान में जिहाद के नाम पर सभाएं होती हैं और फंड इकट्ठे किए जाते हैं।

– एजेंसी

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