राज्य सरकार और एडवोकेट जनरल के कामकाज में बाधा डाल रहे हैं सिद्धू

पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू राज्य सरकार और एडवोकेट जनरल के कार्यालय के कामकाज में बाधा डाल रहे हैं। यह आरोप पूर्व महाधिवक्ता एपीएस देयोल ने लगाया है। एपीएस दयोल ने एजी बनाए जाने के बाद विवाद बढ़ने पर एक नवंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। दरअसल, उनकी नियुक्ति पर सिद्धू ने आपत्ति जताई थी।
एपीएस देयोल की नियुक्ति मामले को सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के गुट ने अपनी बढ़त के रूप में पेश किया। इसके बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने अचानक प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर सूबे की सियासत में हड़कंप मचा दिया। कांग्रेस आलाकमान ने इसके बाद डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने पिछले दिनों कहा था कि पंजाब कांग्रेस एकजुट है। शुक्रवार को सिद्धू ने भी अपना इस्तीफा वापस ले लिया।
फिर बढ़ सकती है तकरार
नवजोत सिंह सिद्धू ने इस्तीफा वापस लेने के बाद शर्त रख दी है कि नए एजी व पैनल की नियुक्ति के बाद वे अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यभार वापस ग्रहण करेंगे। इसके बाद पूर्व एजी का बयान आने को लेकर चर्चा तेज है। कहा यह जा रहा है कि प्रदेश की राजनीति में इससे एक बार फिर विवाद उत्पन्न हो सकता है। एपीएस दयोल को सीएम चन्नी का काफी करीबी माना जाता है। ऐसे में राजनीति गरमानी तय है।
पूर्व एजी का करारा हमला
पूर्व एजी देयोल ने नवजोत सिद्धू पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सिद्धू के लगातार बयानों से नशीले पदार्थों और बेदअदबी के मामले में राज्य सरकार की न्याय सुनिश्चित कराने के गंभीर प्रयासों पर असर पड़ रहा है। वे इस प्रकार के बयानों से सरकार के प्रयासों को पटरी से उतारने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धू अपने राजनीतिक सहयोगियों को राजनीतिक लाभ दिलाने के लिए गलत सूचना दे रहे हैं।
संवैधानिक कार्यालय का कर रहे राजनीतिकरण
पूर्व एजी ने नवजोत सिंह सिद्धू पर आरोप लगाया कि वे प्रदेश के महाधिवक्ता के संवैधानिक कार्यालय का राजनीतिकरण कर रहे हैं। उनके इस प्रकार के कार्यों का पार्टी के आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन पर असर पड़ेगा। उन्होंने सिद्धू पर स्वार्थ की राजनीति करने का भी आरोप लगाया। एपीएस देयोल ने कहा कि वे पार्टी के कामकाज को खराब करने के लिए निहित स्वार्थ के तहत काम कर रहे हैं। अभी तक इस मामले में सिद्धू की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ना तय है।
-एजेंसियां

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