श्रीकृष्ण का साक्षात् स्वरूप ही श्रीमद्भागवत है: डॉ. मनोज मोहन

मथुरा। द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण एवं भागवत जी में कोई भी अंतर नहीं है, इस ग्रंथ में समाज एवं जीवन के विभिन्न पहलुओं की लीलाओं के माध्यम से व्याख्या की गई है।

उक्त विचार अंतर्राष्ट्रीय भागवताचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री ने श्रीनाथ धाम में आयोजित झूलनोत्सव के पावन पर्व पर अष्टोत्तरशत (108) श्रीमद्भगवत पारायण एवं कथा महोत्सव (रजत महोत्सव) के सुअवसर पर व्यक्त किए। ब्रज यातायात एवं पर्यावरण जन जागरूकता समिति के सभी सदस्यों के मध्य भागवताचार्य ने कहा क‍ि यदि आप स्वस्थ रहेंगे तभी कोई धर्म या निज कर्म कर सकेंगे।

ब्रज यातायात एवं पर्यावरण जन जागरूकता समिति के कार्यों की प्रशंसा करते हुए व्यास पीठ से डॉ. शास्त्री ने कहा कि समिति ने जीवन रक्षा के विभिन्न प्रकल्पों जैसे हेलमेट वितरण, रक्तदान आदि से समाज में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

प्रदेश अध्यक्ष विनोद दीक्षित के नेतृत्व में कोरोना काल में विशेष सेवा एवं सहयोग के लिए डॉ. मनोज मोहन शास्त्री को कोरोना योद्धा सम्मान से सम्मानित करते हुए समिति ने पुन: प्रदेश संरक्षक बनाया। सम्मान समारोह कार्यक्रम के संयोजक हरवीर चौधरी ने कहा क‍ि हमारी मुहिम ऐसे लोगों के लिए लगातार चलाई जाएगी जिन्होंने कोरोना काल के अंतर्गत समाज की विशेष सेवा की है।

इस अवसर पर श्रीमती मीरा शास्त्री, पद्मनाभ शास्त्री, सुदेवी-पीयूष शर्मा, श्रीमती सुलेखा बंसल, मुकेश शर्मा, बृजेश शर्मा, चंद्र मोहन दीक्षित, सत्यदेव शर्मा, अर्जुन पंडित, कुलदीप शास्त्री, दीपक वर्मा चंद्रकत पांडे, विनोद पांडे, दीपेश चौधरी, शिवम अग्निहोत्री, महेश मुंधरा, ममता-गोपाल कृष्ण चितलाँगिया, चंदा-विजय ठाकुर, लीला-रामदास सोनार, गिरिजा श्रीवास्तव, दीपाली-अजय चौरसिया व दुष्यंत सिंह आदि उपस्थित रहे।

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