रासोत्सव में दूसरे दिन हुई श्री गौरांग अवतार प्रयोजन व नंदोत्सव लीला

आगरा। चैतन्य महाप्रभु का जन्म आज से लगभग 500 वर्ष पूर्व हुआ। यह अवतार भगवान का अपने भक्तों को भक्ति दिखाने के लिए हुआ। उन्होंने स्वयं भी संकीर्तन किया और अपने भक्तों को भी संकीर्तन की प्रेरणा दी। इस अवतार में भगवान ने राधा भाव का आनंद लिया और वृंदावन में बहुत सारी लीलाएं कीं। वह वृंदावन जो भगवान के जाने के बाद आलोप हो गया था उसको फिर से प्रकट किया। ताकि कलयुग के पतित जीवन का उद्धार हो सके। ये कहना था रसोत्सव का मंचन करते हुए पदम् श्री हरिगोविन्द महाराज के शिष्य मुकेश हरि शर्मा एंव प्रदीप शर्मा का | जयपुर हाउस स्थित जनक महल पार्क में श्री राधे चैतन्य महाप्रभु सेवा समिति परिवार द्वारा आयोजित रसोत्सव 2018 में दूसरे दिन प्रातः के सत्र में श्री गौरांग अवतार प्रयोजन लीला व संध्या सत्र में नंदोत्सव लीला मंचन किया गया | इन रासलीलाओं को देख दर्शकों को ऐसा लग रहा मानो सभी भक्तगण असलियत में श्रीकृष्ण के युग में पहुंच गए हों।

श्री गौरांग लीला मंचन में
नवदीप में श्रीवास, मुकुंद, मुरारी आदि भक्त द्वैताचार्य के समीप जाते है और सभी मिलकर गऊलोक बिहारी श्री कृष्ण को पृथ्वी पर प्रकट होने को पुकारते है| उनकी यह पुकार गऊलोक धाम में श्री कृष्ण के समीप पहुँच जाती है| वहां मधुमंगल के पूछने पर श्री कृष्ण बताते है कि भूलोक पर मेरे भक्त मुझे प्रकट करने को भावपूर्ण अनुष्ठान कर रहे है इसलिए अब मुझे जाना ही पड़ेगा| आगे कहते है कि अबकी बार श्री राधारानी जी के ह्रदय का भाव त्याग, करुणा एंव उदारता के साथ उनकी गौरंग कांति को लेकर मैं श्याम से गऊ बनूंगा और भगवान से भक्त बनूँगा | ब्रज का प्रेम भक्तिकाल के प्रभाव से नष्ट हो चूका है उसकी पुनः स्थापना करूँगा और हरिनाम संकीर्तन द्वारा कलयुग के युग धर्म का प्रचार करूँगा | इसी के साथ श्री राधा जी को भी भूलोक पर प्रकट होने के अपने मनोभाव को बताते हुए उनके ह्रदय का भाव अंग कान्ति जिसे श्री राधा पुष्प माला एंव अपनी ओढ़नी रूपी दिव्य वस्त्र के द्वारा प्रदान करती है तथा वही पर श्री राधा कृष्ण मिलकर एक नवीन स्वरूप को प्रगट करते है |

श्री कृष्ण लीला मंचन में
श्री कृष्ण का वाटर मथुरा में कंस के कारागार में देवकी वासुदेव के सम्मुख होता है उसी समय मायापति की आज्ञा से उनकी माया ब्रज में यशोदा के द्वारा कन्या के रूप में प्रकट होती है जिसका आभास माँ यशोदा को नहीं है | कारागार में प्रकट होने वाले श्री कृष्ण बाल स्वरूप धारण करते है | वासुदेव जी के सभी बंधन खुल जाते है और पहरेदार गहरी नींद में सो जाते है| वासुदेव बालकृष्ण को ब्रज में नन्द भवन में पहुंचा कर वहां से कन्या को लेकर कारागार में लोट आते है | ब्रज में कृष्ण जन्म की बधाई में सभी गोप-गोपी सुन्दर परिधानों व अलंकारों से सुसज्जित होकर सुन्दर-सुन्दर बधाई सामग्री के साथ नन्द भवन में नाचते गातें है| इसी क्रम में कैलाश से भगवान शिव भी अपने आराध्य देव बाल कृष्ण के दर्शन को आते है लेकिन माँ यसोदा भूतनाथ के विचलित भेष को देख कर अपने लला को दिखाने से मना कर देती है | भक्त वात्सल्य बालकृष्ण रोने लगते है तो माँ यशोदा भोलेनाथ को आग्रह पूर्वक बुला कर अपने बाल गोपाल के दर्शन कराने पड़ते है | इसी के साथ दूसरे दिन की श्री कृष्ण लीला का श्री राधे के जयकारों के साथ समापन हुआ।

ये रहे मौजूद
इस अवसर पर प्रमुख रूप से महेश चंद्र गोयल, रमेश बाबू गुप्ता, पंकज अग्रवाल, कृष्ण गोपाल अग्रवाल, नवीन कालरा, सुरेश चंद्र गर्ग, राजकुमार मिश्र, विष्णु दयाल, राजकुमार चतुरानी, दिवाकर महाजन, यज्ञबल शर्मा, आश शर्मा, मुनेंद्र वार्ष्णेय, दिनेश गोयल, अमित गोयल, पीडी अग्रवाल, विपिन गुप्ता, इवीएस गर्ग, दिनेश अग्रवाल उर्फ़ राजाबाबू, सुनीता गोयल, आशा गोयल, उषा बंसल, अलका गोयल, कान्ता देवी, डोली अग्रवाल, शोभा अग्रवाल, शशि वार्ष्णेय, मीनाक्षी अग्रवाल, कमलेश आदि मौजूद रहे |

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