श्री 1008 जम्बूस्वामी दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र चौरासी में चौबीसी की वेदियों का विशाल स्तर पर शिलान्यास समारोह

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श्री 1008 जम्बूस्वामी दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र चौरासी में चौबीसी की वेदियों का विशाल स्तर पर शिलान्यास समारोह

मथुरा। बृजभूमि की पावन वसुन्धरा पर स्थापित अन्तिम अनुबद्ध केवली भगवान श्री जम्बूस्वामी की निर्वाण स्थली श्री 1008 जम्बूस्वामी दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र चौरासी मथुरा चौबीसी की वेदियों का विशाल स्तर पर शिलान्यास समारोह परम पूज्य मुनि श्री 108 मंगलानंद सागर जी महाराज के पावन सानिध्य एवं विधानाचार्य पं० जिनेन्द्र जैन शास्त्री श्रमण ज्ञान भारती, मथुरा के निर्देशन में दिनांक 14 अप्रैल 2017 को प्रातः 8 बजे से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम में भक्तों ने वेदी में पंचरत्न कलश स्वस्तिक पारा, मंगलदीप आदि मंगल द्रव्य स्थापित एवं पंच परमेष्ठीयों कि पूजा अर्चना भक्तिभाव पूर्वक की।
कार्यक्रम के तत्पश्चात् मुनि श्री 108 मंगलानंद सागर जी महाराज ने अपने मंगलमयी प्रवचनों के माध्यम से समस्त श्रद्धालु भक्तजनों को यह संदेश दिया कि जीवन में संसार की कोई भी वस्तु हमें सुख नहीं दे सकती है । अगर सुख प्राप्त करना है तो हमें भगवान की भक्ति एवं सत्य एवं अहिंसा के मार्ग पर चलने से सच्चे सुख की प्राप्ति सम्भव है ।
अतः हमें सतकर्मों में अपने जीवन को लगाना चाहिए एवं दूसरों को भी सतकर्म करने का मार्ग बताना चाहिए । यही हमारे जीवन के कल्याण का महत्वपूर्ण मार्ग है । इन्हीं भावनाओं को व्यक्त करते हुये मुनिश्री ने सभी भक्तजनों को अपना मंगल आर्शीवाद प्रदान किया । बृजभूमि की पावन वसुन्धरा पर स्थापित अन्तिम अनुबद्ध केवली भगवान श्री जम्बूस्वामी की निर्वाण स्थली श्री 1008 जम्बूस्वामी दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र चौरासी मथुरा उत्तर भारत का एक मात्र सिद्धक्षेत्र है जो कि प्राकृतिक एवं सुरम्य वातावरण से परिपूर्ण है ऐसे सिद्धक्षेत्र पर भारत की सबसे विशाल ग्रेनाइट पाषाण से निर्मित श्री 1008 भगवान जम्बूस्वामी की 18 फुट ऊँची पद्मासन प्रतिमा विराजमान है । इस स्थान को सिद्धक्षेत्र के नाम से जाना जाता है । सिद्धक्षेत्र वह पवित्र स्थान होता है जहां से कोई भव्य आत्मा निर्वाण को प्राप्त करते हैं । जैन धर्म के अन्तिम अनुबद्ध केवली भगवान जम्बूस्वामी का जन्म राजगृही में हुआ था । भगवान जम्बूस्वामी ने 84 वर्ष की आयु में कर्मों को नाश कर इसी चौरासी सिद्धक्षेत्र से मोक्ष गये । इसीलिये इस क्षेत्र को चौरासी के नाम से जाना जाता है ।
ऐसी पावन देवस्थली पर जैन धर्म के मुख्य आराध्य देव चौबीस तीर्थंकरों की 24 वेदियों को वास्तुदोष के कारण नवीन स्थान पर स्थानान्तरित किया जा रहा है ।
सिद्धक्षेत्र चौरासी के महामंत्री डॉ. जयप्रकाश जैन ने बताया कि कार्यक्रम के समापन के रूप में क्षेत्र के अध्यक्ष सेठ विजय कुमार जैन ने सभी बाहर से पधारे हुये आगन्तुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया एवं उनको शुभकामना व्यक्त की ।
कार्यक्रम में विभिन्न शहरों से आगरा, दिल्ली, कोसी, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, भरतपुर, अलीगढ़, होडल आदि स्थानों से श्रद्धालुगण सम्मिलित हुये ।

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