नए ई-फाइलिंग पोर्टल की कमियां जल्‍द दूर होंगी: नंदन नीलेकणि

नई दिल्‍ली। आईटी कंपनी इन्फोसिस ने कहा है कि वह जल्द ही आयकर विभाग के नए ई-फाइलिंग पोर्टल की खामियों को दूर कर लेगी। इन्फोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए यह बात कही है। बता दें कि मंगलवार को आयकर विभाग के नए इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल की खामियों को लेकर केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट में इन्फोसिस और नंदन नीलेकणि को टैग करते हुए खामियां दुरुस्त करने को कहा था।
आयकर विभाग ने नया पोर्टल सोमवार रात को लॉन्च किया था। इन्फोसिस को 2019 में नेक्स्ट जनरेशन आयकर फाइलिंग प्रणाली तैयार करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। इसका मकसद रिटर्न की प्रोसेसिंग की प्रक्रिया में लगने वाले 63 दिन के समय को कम कर एक दिन करने और ‘रिफंड’ प्रकिया को तेज करना है। कहा गया है कि पोर्टल को पहले से बेहतर बनाया गया है लेकिन लॉन्च होने के बाद से ही इसमें गड़बड़ियों को लेकर ढेर सारी शिकायतें आने लगीं। ट्विटर पर यूजर्स इसकी खामियों को लेकर लगातार शिकायत कर रहे हैं। इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए वित्त मंत्री ने ट्वीट किया था।
क्या लिखा था वित्त मंत्री ने
वित्त मंत्री ने अपने ट्वीट में लिखा है कि आयकर विभाग का ई-फाइलिंग पोर्टल 2.0, जिसका लंबे वक्त से इंतजार था, सोमवार रात 10.45 पर लॉन्च हो गया लेकिन मैंने अपने टाइमलाइन पर तकनीकी खामियों के बारे में शिकायतें देखी हैं। उन्होंने ट्वीट में ही इन्फोसिस और उसके को-फाउंडर नंदन नीलेकणि को टैग करते हुए लिखा कि आशा है कि इन्फोसिस और नंदन नीलेकणि, प्रदान की जा रही सेवा की गुणवत्ता के मामले में हमारे करदाताओं को निराश नहीं करेंगे। करदाताओं के लिए अनुपालन में आसानी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
नंदन नीलेकणि ने क्या दिया जवाब
नंदन नीलेकणि ने ट्वीट में लिखा, ‘नया ई-फाइलिंग पोर्टल फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाएगा और अंतिम यूजर के अनुभव को बेहतर बनाएगा। निर्मला सीतारमण जी, पहले दिन हमने कुछ तकनीकी समस्याएं देखीं और हम उन्हें दूर करने के लिए काम कर रहे हैं। इन्फोसिस को इन शुरुआती गड़बड़ियों के लिए खेद है और सप्ताह के दौरान सिस्टम के स्थिर होने की उम्मीद है।’
GSTN पोर्टल भी इन्फोसिस ने ही किया था तैयार
इन्फोसिस ने जीएसटी नेटवर्क (GSTN) पोर्टल भी तैयार किया था। इसका उपयोग जीएसटी भुगतान और रिटर्न फाइलिंग में किया जाता है। इन्फोसिस को जीएसटीएन पोर्टल को लेकर भी करदाताओं की आलोचना का सामना करना पड़ा था।
-एजेंसियां

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