Rajiv इंटरनेशनल स्कूल की झलकियां में दिखा ‘लघु भारत‘

Rajiv काॅलेज आॅफ फार्मेसी के डायरेक्टर ज्ञानेन्द्र शर्मा ने बच्चों के उत्साहपूर्वक किए कार्यो की भूरि-भूरि की प्रशंसा

मथुरा। Rajiv इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने बीते दिवस देश के विभिन्न राज्यों की झाकियां प्रस्तुत कीं। ये झाकियां रचनात्मक क्रिया-कलाप के अंतर्गत प्रदर्शित की गईं। इससे राजीव इंटरनेशनल स्कूल के मंच पर ‘लघु भारत‘ के दर्शन होने लगे। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजीव काॅलेज आॅफ फार्मेसी के डायरेक्टर ज्ञानेन्द्र शर्मा रहे।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं प्रधानाचार्य शैलेंद्र सिंह ग्रेवाल ने फीता काटकर किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को देश की विभिन्न संस्कृति से अवगत कराना रहा। अंत में प्रधानाचार्य ने मुख्य अतिथि को स्मृति-चिह्न भेंट किया।

मुख्य अतिथि और Rajiv फार्मेसी के निदेशक ज्ञानेन्द्र शर्मा ने बच्चों के उत्साहपूर्वक किए गए कार्यो की भूरि- भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शिक्षा से बच्चों में आत्म विश्वास बढ़ता है, जो उनके लिए श्रेष्ठ है। बच्चे अपने जीवन में इसी आत्मविश्वास के सहारे बडे-बडे से काम कर जाते हैं।

आरके एजुकेशन हब के अध्यक्ष डा. रामकिशोर अग्रवाल और वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल बोले-भारत है विविधताओं से भरा देश

आरके एजुकेशन हब के अध्यक्ष डा. रामकिशोर अग्रवाल और वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल ने इस अवसर पर बच्चों की प्रशंसा की, कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां के खान-पान , वेश-भूषा , रहन-सहन , जलवायु एवं कृषि का अपना अलग महत्त्व है। इस प्रकार की क्रिया-कलाप द्वारा हम एक ही समय में संपूर्ण देश के दर्शन कर उनका बौद्धिक विकास कर सकने में सफल हुए हैं। राजीव इंटरनेशनल स्कूल में इस प्रकार की शिक्षा प्रदान की जा रही है, जो बच्चों के मानस पटल पर सदैव के लिए अंकित हो जाए।

स्कूल के मैनेंिजंग डायरेक्टर मनोज अग्रवाल ने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यह एक क्रिया कलाप ही नहीं है यद्यपि इसके माध्यम से बच्चे अलग-अलग राज्यों के रीति-रिवाजों एवं परंपराओं से भी अवगत हुए हैं। जो अपने आप में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

स्कूल के प्रधानाचार्य शैलेन्द्र सिंह ग्रेवाल ने बच्चों के कार्यो की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां शिक्षा केवल पुस्तकों के माध्यम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें क्रिया-कलापों द्वारा प्रत्यक्ष ज्ञानार्जन कराना ही हमारा उद्देश्य है। ताकि बच्चे अधिक से अधिक अपने देश को समझ सकें। इसके साथ ही उनमें परस्पर सहयोग एवं प्रेम की भावना का विकास हो।

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