मिलावट और घटतोली करे दुकानदार तो यूं करें कार्यवाही…

त्योहारों का मौसम करीब आ रहा है। इस दौरान परिचितों, रिश्तेदारों और मित्रों में बांटने एवं अपने इस्तेमाल के लिए मिठाई और अन्य चीजों की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ बेईमान दुकानदार ज्यादा मुनाफा कमाने की चक्कर में मिलावट करने के साथ-साथ वजन भी कम तौलता है। ऐसे में आप इन दो समस्याओं से कैसे निपट सकते हैं, आइए जानते हैं…
मिलावट
देश में खाद्य सामग्री का मानक सुनिश्चित करने के लिए फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई-FSSAI) नाम की संस्थान है। खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन या बिक्री से जुड़े सभी संगठनों को एफएसएसएआई में पंजीकरण कराना होता है और इसके रेग्युलेशंस पर अमल करना होता है।
मिलावट का मतलब क्या?
खाद्य सामग्री में मिलावट का मतलब है कि किसी खाद्य उत्पाद में कोई ऐसी चीज मिलाना या उससे हटाना जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो। मिलावट जान-बूझकर भी की जा सकती है या अनजाने में भी हो सकती है। कई बार खाद्य सामग्री का सही रखरखाव नहीं होने की वजह से भी उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।
मिलावट के लिए सजा का प्रावधान
किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट करने से अगर उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है या फिर उसकी शुद्धता में निर्धारित मानक से ज्यादा गिरावट होती है या फिर गलत तरीके से ब्रैंडिंग की जाए तो इस तरह के खाद्य पदार्थ के आयात, निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण पर छह महीने की सजा और कम से कम 1000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जेल की सजा को छह महीने से बढ़ाकर 3 साल तक किया जा सकता है।
भले ही मिलावट से सेहत को कोई नुकसान न हो फिर भी इस तरह के खाद्य पदार्थ के आयात, निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण पर छह महीने की सजा और कम से कम 1000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जेल की सजा को छह महीने से बढ़ाकर 3 साल तक किया जा सकता है।
किसी खाद्य निरीक्षक को सैंपल लेने या जुर्माने के उनके अधिकार का इस्तेमाल नहीं करने देने की स्थिति में छह महीने की सजा और कम से कम 1000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जेल की सजा को छह महीने से बढ़ाकर 3 साल तक किया जा सकता है।
किसी खाद्य सामग्री के बारे में अगर झूठी वॉरंटी लिखित रूप में दी जाती है तो छह महीने की सजा और कम से कम 1000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जेल की सजा को छह महीने से बढ़ाकर 3 साल तक किया जा सकता है।
खाद्य पदार्थ में अगर किसी ऐसे चीज की मिलावट की गई है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो इस तरह के खाद्य पदार्थ के आयात, निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण पर छह महीने की सजा और कम से कम 2000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जेल की सजा को छह महीने से बढ़ाकर 6 साल तक किया जा सकता है।
अगर कोई ऐसी चीज मिलावट की गई है जो जहरीली है या फिर जिससे मौत हो सकती है या शरीर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है तो इस तरह की मिलावट वाली चीजों को बेचने या वितरण करने पर कम से कम 3 साल जेल की सजा और 5000 रुपये न्यूनतम जुर्माना देना पड़ेगा। जेल की सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास की सजा में बदला जा सकता है।
कैसे की जाती है मिलावट की जांच
फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड्स ऐक्ट, 2006 को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। राज्य के फूड सेफ्टी ऑफिसर्स खाद्य सामग्री का सैंपल जमा करते हैं। वे इस सैंपल को जांच के लिए एफएसएसएआई द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजते हैं। अगर सैंपल में मिलावट पाया जाता है तो एफएसएसएआई ऐक्ट के प्रावधान के मुताबिक कार्यवाही की जाती है।
मिलावट से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब
सवाल: किसी दुकान या रेस्ट्रॉन्ट से सामान लेने पर अगर उसमें मिलावट का शक हो तो उसकी शिकायत कहां की जा सकती है?
जवाब: इसकी शिकायत खाद्य सुरक्षा अधिकारी या निर्धारित अधिकारी या इलाके के डीसी या फिर राज्य खाद्य सुरक्षा आयुक्त से शिकायत की जा सकती है।
सवाल: संभावित खाद्य सुरक्षा घटना की रिपोर्ट कैसे कर सकते हैं?
जवाब: उपभोक्ता को खाद्य सुरक्षा अधिकारी या निर्धारित अधिकारी या इलाके के डीसी या फिर राज्य खाद्य सुरक्षा आयुक्त से शिकायत करनी चाहिए।
सवाल: खाद्य सुरक्षा से संबंधित जानकारी कहां से हासिल की जा सकती है?
जवाब: खाद्य सुरक्षा से संबंधित जानकारी FSSAI की वेबसाइट से हासिल की जा सकती है।
सवाल: क्या डिब्बाबंद और बोतलबंद पानी भी एफएसएसए, 2006 के तहत आएंगे?
जवाब: हां
सवाल: किसी खाद्य पदार्थ में कोई चीज मिलावट की सीमा क्या होती है, कैसे पता चलेगा?
जवाब: एफएसएसएआई की वेबसाइट पर एफएसएसएआई रेग्युलेशन 2010 में मिलावट के नियम हैं। कोई चीज किस सीमा तक मिलाई जा सकती है और किस सीमा के बाद उसे मिलावटखोरी में शामिल किया जाएगा, सारी जानकारी उसमें मिल जाएगी।
सवाल: किसी खाद्य सामग्री के रिकॉल (बाजार से वापस मंगाना) का क्या मतलब और मकसद है?
जवाब: रिकॉल उस प्रक्रिया का नाम है जिसमें बाजार में खाद्य पदार्थ के वितरण, बिक्री और उपभोग पर रोक लगाई जाती है। जब किसी चीज में मिलावट पाई जाती है या कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करते पाया जाता है तो उस खाद्य सामग्री को रिकॉल कर लिया जाता है। रिकॉल की प्रक्रिया का मकसद इस तरह की खाद्य सामग्री के सेवन से उपभोक्ताओं को होने वाले खतरे की संभावना को कम करना है।
सवाल: खाद्य पदार्थों के रिकॉल से संबंधित सूचनाएं कहां से हासिल की जा सकती हैं?
जवाब: खाद्य पदार्थों के रिकॉल की जानकारी फूड अथॉरिटी की वेबसाइट से हासिल की जा सकती है।
सवाल: अगर रिकॉल किया गया प्रोडक्ट किसी उपभोक्ता के पास हो तो वह क्या करे?
जवाब: उत्पाद का उपभोग नहीं करना चाहिए और उस दुकानदार को लौटा देना चाहिए जहां से खरीदा हो या कंपनी के प्रतिनिधि को लौटा सकते हैं।
माप-तौल में धोखा हो तो
– किसी भी पैक्ड सामान को खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उस पर उत्पादक/पैक करने वाले/आयात करने वाले का नाम व पता, उस चीज का नाम, उसका वजन, उत्पादन या आयात का महीना व साल लिखा हो। ऐसा न होने पर शिकायत जरूर करें।
– खाने-पीने के सामान पर एक्स्पायरी डेट का भी होना जरूरी है।
– मिठाई के साथ डिब्बे का वजन नहीं तौला जाता है। दुकानदार वजन एडजस्ट करने की बात कहता है तो वह भी गलत है। इस तरह की एडजेस्टमेंट नहीं होती। अगर कोई ऐसा करता है तो शिकायत जरूर करें।
– पेट्रोल पंप पर पेट्रोल, डीजल या दूसरी चीजों की सही मात्रा मिले, यह तय करना भी राज्य सरकार के माप-तौल विभाग की जिम्मेदारी है। अगर आपका शक सही निकलता है तो डीलर को छह महीने की सजा हो सकती है।
– पेट्रोल पंप पर पेट्रोल-डीजल की मात्रा चेक करने के लिए पांच लीटर का जार उपलब्ध होता है। इस पर माप-तौल विभाग की सील व उसकी अवधि जरूर चेक कर लें।
– व्यापारी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे माप-तौल उपकरण (तराजू आदि) सही हैं या नहीं, यह परखने के लिए उपकरण पर लगी माप-तौल विभाग की सील (मुहर) चेक कर सकते हैं। इस सील पर जारी करने वाले इंस्पेक्टर का कोड, आईडी नंबर व वेरिफिकेशन का साल लिखा होता है। वैसे, माप-तौप उपकरणों पर लगी सील की जांच करने पर हमने पाया कि उस पर कुछ भी साफ नहीं है। जारी करने वाले इंस्पेक्टर का कोड/आईडी नंबर आदि कुछ भी पढ़ने लायक स्थिति में नहीं है। विभाग द्वारा जारी वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट को व्यापारियों ने डिस्प्ले नहीं कर रखा है जबकि यह कानूनन अनिवार्य है।
– अगर आपको फिर भी संदेह है तो व्यापारी से विभाग द्वारा जारी सर्टिफिकेट दिखाने को भी कह सकते हैं। अगर वह ऐसा न करे तो उसकी शिकायत करें।
– विभाग द्वारा जारी किए गए सर्टिफिकेट को डिस्प्ले करना व्यापारियों के लिए जरूरी है।
– लोहे के बाट व काउंटर मशीन के लिए दो साल में व इलेक्ट्रॉनिक मशीन के लिए हर साल विभाग से लाइसेंस रिन्यू कराना जरूरी है।
ग्राहकों को नहीं पता नियम
डिब्बे के साथ मिठाई को तौलने पर 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।अधिकारियों ने बताया कि नियम है कि ग्राहक के सामने पहले दुकानदार डिब्बे का वजन करेगा। मिठाई तौलने के दौरान डिब्बे का वजन अतिरिक्त जोड़ा जाएगा। अधिकांश दुकानदार नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। ग्राहकों को भी नियम की जानकारी न होने के कारण वह ठगे जा रहे हैं। पैकेज्ड कॉम्मोडिटीज रूल्स 2011 में नियम है कि अगर पैकिंग की मिठाई का वजन कम है और उसे बेचा जा रहा है तो ऐसे में 10,000 जुर्माना किया जा सकता है। इतना ही नहीं दुकानदार को पैकेज्ड मिठाई का भार ग्राहक के सामने करने का भी नियम है। अगर वह ऐसा नहीं करता तो दुकानदार पर 2,000 से लेकर 10,000 तक का जुर्माना किया जा सकता है।
हेल्पलाइन
– कोई भी ग्राहक या गैर-सरकारी संगठन कम वजन तौलने या नापने की लिखित शिकायत स्टैंर्डड्स ऑफ वेट्स ऐंड मेजर्स (एनफोर्समेंट) ऐक्ट 1985 के तहत मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट को कर सकता है।
– आप कंट्रोलर, माप-तौल विभाग को फोन, फैक्स, लिखित या मेल से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आमतौर पर विभाग 15 दिन के अंदर बताता है कि आपकी शिकायत पर क्या कार्यवाही हुई।
-एजेंसियां

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