हिंद महासागर में चीन की विस्‍तारवादी नीति को तगड़ा झटका, थाईलैंड के क्रा कैनाल प्रोजेक्ट की दौड़ में भारत भी शामिल

हिंद महासागर में चीन की विस्‍तारवादी नीति को तगड़ा झटका लगा है। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण थाईलैंड के क्रा कैनाल (क्रा नहर परियोजना) प्रोजेक्ट को बनाने की रेस में अब भारत भी शामिल हो गया है। 135 किलोमीटल लंबी यह नहर थाईलैंड की खाड़ी को अंडमान सागर से जोड़ेगी। इससे हिंद महासागर और साउथ चाइना सी के बीच की दूरी कम हो जाएगी। पहले अंदेशा जताया जा रहा था कि यह प्रोजेक्ट चीन को मिल गया है, लेकिन थाई सरकार ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।
चीन को नहीं मिला कैनाल प्रोजक्ट
थाईलैंड के एक संसदीय पैनल ने दावा किया कि कई राष्ट्रों ने दक्षिणी थाईलैंड में क्रा कैनाल के निर्माण में रुचि दिखाई है। इससे साउथ चाइना सी से हिंद महासागर में आने वाले जहाजों को मलक्का जलडमरूमध्य का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इससे उन जहाजों के समय और ईंधन की खपत में भी कमी आएगी।
रेस में भारत, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका भी शामिल
इस प्रोजक्ट की व्यवहार्यता का अध्ययन करने वाली संसदीय समिति के प्रमुख और थाई नेशन पावर पार्टी के सांसद सोंगक्लोड थिप्रैट ने कहा कि क्रा इस्तमुस में एक नहर बनाने का सदियों पुराना सपना वास्तविकता बनने के करीब पहुंच रहा है। चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देश इस परियोजना पर थाईलैंड का समर्थन करने के इच्छुक हैं।
30 से अधिक विदेशी फर्म थाई सरकार के संपर्क में
सांसद सोंगक्लोड ने थाई मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि ये सभी देश कैनाल के निर्माण के लिए हमारे साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना चाहते हैं। कई विदेशी दूतावासों ने इस परियोजना की स्टेटस रिपोर्ट के लिए हमसे संपर्क किया है। इस कैनाल के निर्माण के लिए 30 से अधिक विदेशी फर्मों ने हमें वित्तीय और तकनीकी सहायता के साथ निवेश या आपूर्ति करने में रुचि दिखाई है।
हिंद महासागर में चीन का प्लान फेल!
इस कैनाल प्रोजक्ट में भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे चीन के धुर विरोधी देशों की एंट्री से मामला एकदम पलट गया है। पहले अंदेशा जताया जा रहा था कि हिंद महासागर में अपना दबदबा कायम करने के लिए चीन हर हाल में इस प्रोजक्ट को पूरा करना चाहेगा। इससे न केवल वह भारत को कम समय में घेर सकता था, बल्कि उसकी नौसेना अंडमान और निकोबार में भारतीय सैन्य अड्डे के पास भी जल्दी पहुंच जाती।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रोजक्ट
यह कैनाल प्रोजक्ट जिस देश को भी मिलेगा, वह व्यापारिक और सामरिक रूप से इसका इस्तेमाल भी कर सकेगा। इससे उस देश की अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि हिंद महासागर और साउथ चाइना सी में उसका दबदबा भी कायम हो जाएगा। चीन पहले से ही इस प्रोजक्ट को बनाने के लिए प्रयासरत है।
पहले भी चीन को झटका दे चुका है थाईलैंड
थाईलैंड ने कुछ दिन पहले भारी जनविरोध के बाद चीन से 2 पनडुब्बियों को खरीदे जाने की योजना को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था। थाईलैंड की सरकार ने संसद से अगले साल के बजट में से चीन को इन पनडुब्बियों के लिए एडवांस में पैसे देने की अपनी योजना को भी वापस ले लिया है। थाईलैंड ने चीन के साथ जून 2015 में पनडुब्बियों के खरीद को लेकर बातचीत शुरू की थी। थाईलैंड की कैबिनेट ने पहली पनडुब्बी की खरीद को लेकर 2017 में अपनी मंजूरी दे दी थी। इसके लिए थाईलैंड चीन को 434.1 मिलियन डॉलर की रकम देने वाला था। इस पनडुब्बी की डिलीवरी 2013 में होनी थी लेकिन शेष दो यूआन क्लास की एस26टी डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के खरीद को लेकर बात नहीं बन पाई। चीन ने इन दो पनडुब्बियों के लिए 720 मिलियन डॉलर की मांग की थी, जबकि थाईलैंड ने इसे बहुत ज्यादा बताया था।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *