‘जनाक्रोश रैली’ के जरिए मुलायम की मौजूदगी में शिवपाल ने दिखाई ताकत

लखनऊ। समाजवादी पार्टी से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाने वाले दिग्‍गज नेता शिवपाल यादव ने रविवार को यूपी की राजधानी लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर मैदान में ‘जनाक्रोश रैली’ आयोजित कर अपनी ताकत का अहसास कराया। यह शिवपाल की पार्टी की ओर से आयोजित पहली रैली थी। एसपी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी इस रैली में हिस्‍सा लेने पहुंचे।
यही नहीं, मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा भी मंच पर नजर आईं और उन्‍होंने ऐलान किया कि वह चाचा जी (शिवपाल यादव) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं।
शिवपाल यादव ने इशारों ही इशारों में एसपी सुप्रीमो अखिलेश यादव पर भी जमकर हमला बोला। उन्‍होंने कहा, ‘यहां नेताजी बैठे हैं। आपके साथ मैंने 40 साल काम किया है। हम तो नेताजी से साथ समाजवादी पार्टी में ही रहना चाहते थे। मुख्यमंत्री या मंत्री का भी पद नही मांगा। नेताजी ने जो आदेश दिया उसका पालन किया। परिवार में चाहे छोटा हो या बड़ा है, सबकी बात सुनी। आप सब लोग मौजूद थे। रजत जयंती पर मैंने कहा था कि मुझे कोई पद नहीं चाहिए।’
उन्‍होंने कहा, ‘मुझे तो बस सम्मान चाहिए था। नेताजी का सम्मान चाहिये था। नेताजी मैंने बहुत इंतजार किया। आपने भी बहुत प्रयास किया लेकिन यह सब चुगलखोर, चापलूसों और जनाधार विहीन लोगों की वजह से हुआ। मैंने उनका भी सम्मान किया लेकिन नेताजी न आपकी सुनी गई और न मेरी सुनी गई। तब मैंने आपसे पूछकर पार्टी बनाई। भगवती सिंह और रामनरेश यादव गवाह हैं कि मैंने आपसे पूछा था। दुबारा भी आपसे पूछा तब जाकर पार्टी बनाई।’
रैली के दौरान शिवपाल यादव के निशाने पर बीजेपी भी रही। उन्‍होंने कहा कि देश से बीजेपी को हटाने के लिये उनकी पार्टी तैयार है। शिवपाल ने कहा कि इस समय देश पर अरबों रुपये का कर्ज है। हजारों वर्ग मील जमीन पर पाकिस्तान और चीन का कब्जा है। उन्‍होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि उनका 56 इंच का सीना है जो अब एकाध इंच बढ़कर 57 इंच हो गया होगा लेकिन आपके सीने में दम नहीं है। पाकिस्तान तक का कब्जा बढ़ता जा रहा है।’
उन्‍होंने कहा, ‘देश को फिर से दंगे में झोंकने की साजिश रची जा रही है। नेताजी (मुलायम) आप मुख्यमंत्री थे तब अक्टूबर 1989 में आपने बाबरी मस्जिद को बचाया था लेकिन 1992 में क्या हुआ ? हम देश को फिर दंगे में नही झोंकने देंगे।’
रैली के दौरान मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव ने कहा, ‘यह परिवर्तन की लड़ाई है। मैं आभारी हूं चाचा जी (शिवपाल) का जिन्होंने मुझे यहां बुलाया। मैं हर तरह से आपके साथ खड़ी हूं।’
शिवपाल बेटे आदित्‍य यादव भी मंच पर नजर आए। उन्‍होंने कहा, ‘आज दिल्ली-यूपी में ऐसी सरकार है जो कहती है आप हमें वोट दो, हम हिन्दू-मुस्लिम डिबेट देंगे। बेरोजगारी, सुरक्षा, किसानों के सवाल पर चुप्पी है। शहरों के नाम बदले जा रहे हैं। अरे दम है तो नए शहर बसाओ, तब विकास की बात करो। आजकल समाजवाद की बात कई दल करते हैं लेकिन समाजवाद के लिए काम कितने करते हैं।’
बता दें कि यूं तो इस रैली को सरकार की असफलताओं के खिलाफ ‘जनाक्रोश रैली’ का नाम दिया गया है लेकिन इसकी रंगत शिवपाल का वह ‘इकबाल’ तय करेगी, जिसे अब भी बुलंद होने का दावा उनके समर्थक कर रहे हैं। यही वजह थी कि टीम शिवपाल ने रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी और लाखों लोगों के पहुंचने का दावा किया था। शिवपाल की कोशिश यह साबित करने की है कि वह असली लोहियावादी हैं, अखिलेश नहीं।
-एजेंसी

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