शिया वक्‍फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- Ayodhya में राम मंदिर उसी ज़मीन पर बने

नई दिल्ली। Ayodhya में विवादित बाबरी मस्जिद और राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। उत्तर प्रदेश शिया वक्‍फ बोर्ड ने अदालत में कहा कि Ayodhya में उस जगह कभी भी मस्जिद नहीं थी और वहां कभी मस्जिद हो भी नहीं सकती। वह भगवान राम का जन्मस्थल है और वहां राम मंदिर बनना चाहिए। बोर्ड के अध्‍यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विवाद को सुलझाना चाहते हैं। बाबरी मस्जिद का संरक्षक एक शिया था और इसलिए सुन्नी वक्फ बोर्ड या कोई और भारत में मुसलमानों के प्रतिनिधि नहीं हैं।

आज की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारिख 20 जुलाई को मुकर्रर की है। मुसलमानों और सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड की ओर से वरिष्‍ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि शिया वक्‍फ बोर्ड को इस मामले को बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्‍होंने कहा, ‘जिस प्रकार बामियान बुद्ध की मूर्तियों को मुसलिम तालिबान ने नष्‍ट किया था उसी प्रकार बाबरी मस्जिद को हिंदू तालिबान ने ध्‍वस्‍त किया है।’

शिया वक्फ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील एस. एन. सिंह ने कहा, ‘इस महान देश की एकता, अखंडता, शांति और सद्भाव के लिए शिया वक्फ बोर्ड अयोध्या की विवादित भूमि के मुसलमानों के शेयर को राम मंदिर निर्माण के लिए दान करने के पक्ष में है।’ बोर्ड के अध्‍यक्ष वसीम रिजवी ने कहा, ‘बोर्ड इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा मुसलमानों को दी गयी एक तिहाई भूमि को राम मंदिर बनाने के लिए हिंदुओं को दान करना चाहता है।’

गौरतलब है कि एक आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था, इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था। फैसले में कहा गया था कि विवादित जमीन को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए।

Ayodhya में जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए जबकि बाकी का एक तिहाई जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए।

-एजेंसी

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