शिया धर्मगुरु का बयान, जानबूझकर बनाई गई RSS की कट्टरवादी छवि

लखनऊ। RSS प्रमुख मोहन भागवत के संघ बहुवाद और एकता में विश्वास करता है वाले बयान पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि RSS के बारे में कट्टरवादी संगठन की धारणा जानबूझकर बनाई गई।

‘भविष्य का भारत’ परिचर्चा के जरिए संघ ने साफ किया कि आप पूर्वाग्रह के साथ स्वयंसेवकों की कार्यप्रणाली को नहीं समझ सकते हैं। संघ कभी भी भारत के किसी खास वर्ग की तरक्की की हिमायत नहीं करता है।

RSS प्रमुख के इस बयान पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि ये स्वागत की बात है कि संघ बहुवाद और एकता में विश्वास करता है। इस तरह के विचारों के साथ ही देश की तरक्की हो सकती है। भारत की बेहतरी के लिए इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता है। अगर हिंदू-मुस्लिम एकता कायम रहे तो हमारा देश बहुत आगे जा सकता है। ये बात अलग है कि संघ के बारे में इस तरह की धारणा बनायी गई कि आरएसएस एक कट्टरवादी संगठन है।

‘भविष्य का भारत’ कार्यक्रम के जरिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा था कि सोच को संकीर्ण कर आप संघ की कार्यप्रणाली को नहीं समझ सकते हैं। इसके साथ ही ये भी कहा था कि आरएसएस को समझने के लिए हेडगेवार को समझना होगा। यही नहीं मोहन भागवत ने कहा कि संघ के बारे में खास रणनीति के तहत दुष्प्रचार किया गया। लेकिन सच ये है कि संघ के कार्यकर्ता स्वार्थ का परित्याग कर आम लोगों की सेवा करते हैं। संघ किसी भी रूप में भेदभाव को बढ़ावा नहीं देता रहा है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को ये भी कहा था कि विचारों को बांधना नहीं चाहिए। हमें ये देखना होगा कि भारत की बेहतरी के लिए क्या किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संघ ने उन सभी धाराओं का स्वागत किया है जिसने देश की तरक्की में योगदान दिया। तिरंगे को लेकर RSS की सोच साफ है वो देश के ध्वज का सम्मान करते हैं लेकिन इसके साथ ही भगवा ध्वज को गुरु मानते हैं।

-एजेंसी

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