हिंदी साहित्‍य के प्रमुख व्‍यंग्‍य लेखक शरद जोशी की जयंती आज

हिंदी साहित्‍य के प्रमुख व्‍यंग्‍य लेखक और साहित्‍यकार शरद जोशी आज के ही दिन 1931 में मध्‍यप्रदेश के उज्‍जैन में जन्‍मे थे। कुछ समय तक यह सरकारी नौकरी में रहने के बाद लेखन को ही आजीविका बनाने वाले शरद जोशी ने आरम्भ में कुछ कहानियाँ लिखीं। फिर पूरी तरह व्यंग्य-लेखन करने लगे। उन्होंने व्यंग्य लेख, व्यंग्य उपन्यास, व्यंग्य कॉलम के अतिरिक्त हास्य-व्यंग्यपूर्ण धारावाहिकों की पटकथाएँ और संवाद भी लिखे। हिन्दी व्यंग्य को प्रतिष्ठा दिलाने प्रमुख व्यंग्यकारों में शरद जोशी भी एक हैं। इनकी रचनाओं में समाज की सभी विसंगतियों का बेबाक चित्रण मिलता है।
शरद जोशी ने व्यंग्य लेखन की विधा को एक नया आयाम दिया और अपनी लेखनी के जरिए उस समय की सामाजिक, धार्मिक कुरीतियों और राजनीति पर चुटीला कटाक्ष किया। उनके व्यंग्य आज की परिस्थितियों में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस समय थे।
शरद जोशी ने ‘जीप पर सवार इल्लियां’, ‘परिक्रमा’, ‘किसी बहाने’, ‘तिलस्म, ‘यथा संभव’, ‘रहा किनारे बैठ’, दूसरी सतह, यत्र-तत्र-सर्वत्र, नावक के तीर, मुद्रिका रहस्य, हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे, झरता नीम शाश्वत थीम, जादू की सरकार, पिछले दिनों, राग भोपाली, नदी में खड़ा कवि, घाव करे गंभीर, मेरी श्रेष्ठ व्यंग रचनाएँ, सहित कई किताबें लिखीं।
दो व्यंग्य नाटक अंधों का हाथी, एक था गधा उर्फ अलादाद खाँ
उपन्यास’ मैं, मैं और केवल मैं उर्फ़ कमलमुख बी. ए.
टीवी धारावाहिक यह जो है जिंदगी, मालगुड़ी डेज, विक्रम और बेताल, सिंहासन बत्तीसी, वाह जनाब, दाने अनार के, यह दुनिया गज़ब की तथा लापतागंज।
फिल्मी सम्वाद क्षितिज, गोधूलि, उत्सव, उड़ान, चोरनी, साँच को आँच नहीं, दिल है कि मानता नहीं
पांच सितंबर 1991 को उनका निधन हुआ।
-एजेंसियां

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