गंभीर मानसिक बीमारी है बहुत ज्यादा वीडियो गेम खेलना

न्यू साइंटिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक गेमिंग डिसऑर्डर को बहुत जल्द मेंटल हेल्थ कंडिशन की कैटिगरी में वर्गीकृत किया जाएगा। WHO की डायग्नोस्टिक मैनुअल इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिज़ीज़ का 11वां एडिशन 27 साल पहले अपडेट हुआ था और अब 2018 में पब्लिश होने वाला है। WHO के इस मैनुअल में बहुत ज्यादा वीडियो गेम खेलने को गंभीर मानसिक बीमारी की कैटिगरी में रखने की बात कही जा रही है।
WHO के डिपार्टमेंट ऑफ मेंटल हेल्थ ऐंड सब्सटेंस अब्यूज के व्लादिमिर पोज्नयाक बताते हैं कि बहुत ज्यादा वीडियो गेम खेलने को बीमारी के रूप में समझाना एक बेहद अहम मुद्दा है। पोज्नयाक कहते हैं, ज्यादातर लोग जो वीडियो गेम खेलते हैं उन्हें बीमारी नहीं होती है, ठीक उसी तरह से जैसे ऐल्कॉहॉल पीने वाले सभी लोगों को बीमारी नहीं होती है। हालांकि कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा ऐल्कॉहॉल का सेवन करने या फिर जरूरत से ज्यादा वीडियो गेम खेलने का शरीर पर विपरीत असर पड़ सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफर्ड के इंटरनेट इंस्टिट्यूट के अनुसंधानकर्ताओं ने पिछले साल एक स्टडी की थी जिसमें इस बात की जांच की गई थी कि ऐसे कितने प्रतिशत लोग हैं जिन्हें वीडियो गेम की लत लगी हुई है। अमेरिकन जर्नल ऑफ साइकायट्री में छपी इस स्टडी के नतीजे बताते हैं, इस सर्वे में यूके, यूएस, कनाडा और जर्मनी के 19 हजार महिलाओं और पुरुषों को शामिल किया गया था जिसमें 2 से 3 प्रतिशत लोगों ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर के लक्षणों में से 5 या उससे ज्यादा लक्षणों को खुद में महसूस किया। इन लक्षणों में बेचैनी और असामाजिक व्यवहार शामिल है।
ऑक्सफर्ड की इस स्टडी के लीड ऑथर डॉ ऐन्ड्र्यू प्रिज्बिलिस्की कहते हैं, हमारी जानकारी के मुताबिक इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर जो की एक नई संभावित समस्या है उसके पुख्ता सबूत मिले हैं। हालांकि कई लोग इस बात को लेकर बहस कर सकते हैं कि वीडियो गेम खेलने से मानसिक सेहत पर कोई असर पड़ता है या नहीं लेकिन कुछ लोग विडियो गेम खेलने में जितना समय बिताते हैं वह चौंकाने वाला है। जब अनुसंधानकर्ताओं ने गेम खेलने वालों से बात की तो पता चला कि 10 प्रतिशत लोग 12 से 24 घंटे का समय वीडियो गेम खेलने में बिताते हैं।
-एजेंसी