21 राज्यों के 60 जिलों में हर्ड इम्युनिटी जानने को क‍िया जा रहा Sero survey

नई द‍िल्ली। सामुदायिक संक्रमण हुआ है या नहीं इसका पता लगाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) Sero survey करवा रहा है। Sero survey का काम बिहार सहित देश के 21 राज्यों के 60 जिलों में चल रहा है। बिहार के अरवल, मुजफ्फरपुर और मधुबनी में सर्वे किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में इंदौर समेत चार जिलों में कुल 1,700 आम लोगों के नमूने लिए हैं।

मध्यप्रदेश में इस सर्वेक्षण के तहत आईसीएमआर के जबलपुर स्थित राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (एनआईआरटीएच) के जरिए इंदौर समेत चार जिलों में आम लोगों के रक्त के नमूने जमा किए गए हैं। इंदौर, देश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है जहां अब तक इस महामारी के 3,344 मरीज मिल चुके हैं जिनमें से 126 लोगों की मौत हो चुकी है।

आबादी को संक्रमण के हिसाब से शून्य, निम्न, मध्यम और उच्च में बांटा गया है। इन नमूनों का आकलन करके सामुदायिक संक्रमण के ट्रेंड का पता लगाया जाएगा। सैंपल जांच के लिए नेशनल ट्यूबरक्लोसिस रिसर्च इंस्टीट्यूट तमिलनाडु भेजी जा रही है। उम्मीद है कि 6 जून तक इस सर्वे का नतीजा सामने आ जाएगा।

क्या है Sero survey?
सेरो सर्वे में किसी खास इलाके में एक साथ कई लोगों के ब्लड सीरम टेस्ट किए जाते हैं। इससे ये पता चल जाता है कि आखिर संक्रमण किस स्तर पर फैल रहा है। बिहार में कोरोना जांच के लिए नोडल जांच एजेंसी के तौर पर घोषित राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्सीट्यूट (आरएमआरआई) के डायरेक्टर डॉ. पी दास ने बताया कि अगर आबादी में कोरोना संक्रमण है तो इस जांच से पता चल जाएगा। संक्रमित व्यक्ति में एंटीबॉडी विकसित होता है। इसकी भी जानकारी मिल जाएगी। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक संक्रमण का पता लगाना है।

प्रति महीन, प्रति जिला 800 सैंपल की हो रही अतिरिक्त जांच
सामुदायिक संक्रमण का पता लगाने के लिए सभी जिलों में प्रति सप्ताह रेगुलर जांच के अलावे 200 लोगों की अतिरिक्त जांच की जा रही। यानी एक जिला में एक महीने में 800 अधिक जांच की जाएगी। जांच के लिए जिला के 6 सरकारी व 4 प्राइवेट अस्पतालों का चयन किया गया है। यह जांच लोगों को कम और अधिक जोखिम के हिसाब से दो समूहों में बांटकर किया जाएगा। अधिक जोखिम वाले समूह में स्वास्थ्य कर्मियों को रखा गया है, जबकि कम जोखिम वाले समूह में अस्पताल के ओपीडी में आने वाले सामान्य मरीज व गर्भवत्ती महिला को रखा गया है। गर्भवती महिला को जांच श्रेणी में रखने का आशय यह है कि गर्भवती में संक्रमित होने की संभावना दूसरों की तुलना में कम रहती है।

– एजेंसी

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