फिल्म ‘काला’ के लिए रजनीकांत को भेजा मानहानि का नोटिस

नई दिल्‍ली। अभिनेता रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ 7 जून को रिलीज़ के लिए तैयार है, लेकिन एक तरफ जहां कावेरी नदी विवाद मामले में एक बयान के बाद रजनीकांत की फिल्म को कर्नाटक में बैन करने की बात चल रही है, वहीं दूसरी ओर अब एक लीगल नोटिस भी रजनीकांत को भेजा गई है, जिसमें 101 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा किया गया है।
रजनीकांत को यह नोटिस एस तिराविम के बेटे जवाहर नाडर ने भेजा है। जवाहर कि मानें तो फिल्म ‘काला’ उनके पिता एस तिराविम की लाइफ पर बेस्ड है।
बेटे जवाहर नाडर के मुताबिक ‘रजनीकांत और उनके दामाद धनुष ‘काला’ नाम की एक फिल्म बना रहे हैं, जो कि मेरे पिता का नाम खराब करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। ज्ञात होता है कि यह सब किसी पॉलिटिकल अजेंडे को ध्यान में रखकर द्रविण और हम से जुड़ी पिछड़ी जाति के अधिकारों का हनन करने के लिए किया जा रहा है। मेरे पिता जी का नाम अलग-अलग इंटरव्यू देकर मीडिया में उछाला जा रहा है।’
‘यह सब रजनीकांत उच्च वर्ग और अमीरों का साथ पाने के लिए कर रहे हैं। इन सब कारणों से हमारी 101 करोड़ रुपये की हमारी रेप्युटेशन खराब की गई है। काला करिकालन यह शब्द समाज के दो गुटों को अलग करने की साजिश के तहत दिया गया है इसलिए आप (रजनीकांत और फिल्म की पूरी टीम) लिखित माफीनामा दें। आपको नोटिस मिलने के 36 घंटे के अंदर यह माफी पत्र देना होगा वरना आपको 101 करोड़ रुपये का जुर्माना देना होगा।’
वकील सईद अब्बास ने अपनी नोटिस में लिखा है, ‘सिविल इमेज के तहत और क्रिमिनल और सिविल डैमेज के तहत और क्रिमिनल केस के तहत मुकद्दमा कोर्ट में पेश किया जाएगा। गलत और झूठी बातों के लिए हमें लिखित सफाई चाहिए और लिखित गलती देना होगा। अगर आपने यह नहीं किया तो हम समझेंगे कि यह आप ने जान बूझ कर मेरे क्लाइंट का नाम पब्लिक में उछालने के लिए कर रहे हैं। इस अपराध के लिए हम आपसे हमारी ख्याति खराब करने के लिए 101 करोड़ रुपये का डैमेज डिमांड करते हैं। यह रकम आपको डी डी बनाकर क्लाइंट के घर भेजना होगा अगर आपने यह नहीं किया तो मेरे क्लाइंट मुकद्दमा दायर करेंगे।’
‘मेरे क्लाइंट जवाहर नाडर के पिता एस तिराविम तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से मुंबई 1957 में आए थे मुंबई में उन्होंने छोटे-मोटे काम करके अपना नाम बनाया। उनके पिता हमेशा मुंबई के धारावी, सायन और चेंबूर जैसे इलाकों में लोगों की मदद करते थे। उनके पिताजी तमिलनाडु प्रांत से ताल्लुक रखते हैं और उनका साउथ इंडियन लोगों के प्रति अलग जुड़ाव रहा है। उन्होंने कई लोगों को रोजी-रोटी कमाने में भी मदद की थी।’
’50 और 70 के दशक में मुंबई की स्थिति काफी खराब थी और लोगों को अपना जीवन चलाने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। तमिलनाडु के लोग उन्हें गॉडफादर भी मानते थे। उन्होंने अपने नाम का प्रयोग कर पुलिस और नेताओं से परेशान लोगों की मदद की थी। उनका गुड़ का व्यापार था, उन्हें गुड़ वाला सेठ के नाम से भी जाना जाता था। लोग उन्हें अन्नाची के नाम से भी जानते थे। उनका समाज के हर वर्ग के साथ अच्छा रिश्ता था। उनके खिलाफ मुंबई और तमिलनाडु में किसी भी पुलिस थाने में किसी भी प्रकार का कोई केस दर्ज नहीं था। मुरलीधर और हाजी मस्तान भी उनसे प्रभावित थे और वह उनके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कामों में हाथ बटाने आते थे।’
‘उनके पिताजी कोई भी समाज और कानून विरोधी कार्यों में कभी शामिल नहीं थे। वह प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के थे और उनके बच्चे भी पढ़े-लिखे हैं। उनका छोटा बेटा जवाहर नाडर जाना-माना पत्रकार है। एस तिराविम ने समाज के कमजोर वर्ग के लिए धारावी में एक कामराज मेमोरियल नामक हाईस्कूल शुरू किया था।’
-एजेंसी

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