संस्कृति विवि में World Diabetes Day पर सेमिनार का आयोजन

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के आयुर्वेद एवं यूनानी कालेज के संयुक्त तत्वाधान में World Diabetes Day पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। World Diabetes Day के इस मौके पर वक्ताओं ने भारत में डायबिटीज के बढ़ते प्रभाव, दुष्परिणाम और इससे बचने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि यदि यह बीमारी किसी को वंशानुगत नहीं है तो मामूली सी सावधानियां बरत कर वह इससे बच सकता है।

संस्कृति विश्वविद्यालय के आयुर्वेद कालेज के प्राचार्य डा. सुनील वर्मा ने बताया कि पिछले लगभग डेढ़ दशक से लोग मधुमेह अथवा डायबिटीज के बड़ी तेजी से शिकार हो रहे हैं। इसका बहुत बड़ा कारण तेजी से बदल रही हमारी जीवन शैली है, जिसके कारण भागमभाग वाली शैली के कारण लोगों में तनाव बढ़ रहा है। युवाओं में बढ़ती यह बीमारी चिंता का विषय है।
डायबिटीज रोग को दो प्रकार में बांटा गया है, टाइप वन और टाइप टू । वन टाइप डायबिटीज वंशानुगत होती है, इसको फिलहाल नहीं बदला जा सकता है। दूसरे प्रकार की यानी टाइप टू यह हमारी जीवन शैली और खानपान के बिगड़ने से हो जाती है और इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

विवि के कुलपति डा. राणा सिंह ने कहा कि डायबिटीज के टाइप टू को हम अपनी जीवन शैली और खानपान में सुधार कर काबू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब सारा विश्व आयुर्वेद के चमत्कार से परिचित हो गया है। डायबिटीज में भी आयुर्वेदिक दवाएं कारगर हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। ये बीमारी को जड़ से समाप्त करने में भी सक्षण हैं। यूनानी कालेज के प्राचार्य डा. वकार अहमद ने डायबिटीज से बचाव के लिए प्रतिदिन व्यायाम की आवश्यकता बताई। उन्होंने दवाओं के दुष्परिणामों से बचने के उपाय भी बताए। सेमिनार में संस्कृति विवि के आयुर्वेद कालेज के छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचारों से अवगत कराया।

कार्यक्रम का संचालन डा. ब्रजनंदन परसरिया ने किया। अन्य वक्ताओं में डा. हेमंत कुमार, डा. राम कुमार, डा. योगेश्वर पांडे व डा. चिरवी काकाडे थे।

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