एथिक्स पर सेमिनार: सही व्यवहार, उपचार ही चिकित्सकीय नैतिकता

मथुरा। डॉक्‍टर्स का आपसी सामंजस्य, उनकी संवेदनशीलता, जवाब देही, रोगी को उचित परामर्श एवंं उसकी देख-भाल का चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष महत्व है। रोगी के साथ डॉक्टर्स का सही व्यवहार और उपचार ही चिकित्सकीय नैतिकता है। उक्त बातें आज के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के सभागार में मेडिकल एथिक्स पर आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उपस्थित श्रोताओं के बीच साझा कीं।

सेमिनार का शुभारम्भ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र कुमार, शिशु शल्य विशेषज्ञ डॉ. श्याम बिहारी शर्मा और डॉ. दीपक कालरा द्वारा मां सरस्वती के छायाचित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया गया।

रेडियो डायग्नोसिस डॉ. एस.सी. गोदारा ने अपने सम्बोधन में कहा कि चिकित्सा के पेशे में कम्युनिकेशन का बहुत महत्व है। चिकित्सक को हर पल रोगी के स्वास्थ्य को लेकर न केवल फिक्रमंद होना चाहिए बल्कि जरूरत पड़े तो अपने सहयोगियों से विचार-विमर्श भी करना चाहिए। डॉ. गोदरा ने कहा कि कम्युनिकेशन में ही मरीज की भलाई है।
जनरल सर्जरी के डॉ. विक्रम सिंह यादव ने कहा कि चिकित्सक को मरीज और उसके परिचारक को हर बात स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए इससे चिकित्सक और मरीज के बीच न केवल सामंजस्य बढ़ता है बल्कि इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या भी पैदा नहीं होती। जनरल सर्जरी के ही डॉ. ए. रहमान ने मरीजों की रिपोर्ट को लेकर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. जितेन्द्र राणा ने कहा कि चिकित्सक के लिए मरीज ही सर्वोपरि होता है लिहाजा हमें उसकी भलाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

विशेषज्ञ शिशु शल्य चिकित्सक डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने सेमिनार में उपस्थित जूनियर चिकित्सकों, नर्सेज तथा पैरामेडिकल कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे अपने शालीन व्यवहार और वाणी से न केवल मरीज का दिल जीत सकते हैं बल्कि समाज के सामने सेवाभाव का उदाहरण भी पेश कर सकते हैं।

पैथोलाजी के डॉ. एस.जी. गुप्ता ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में मरीज का सही उपचार बहुत कुछ उसकी जांच और परीक्षण पर निर्भर करता है लिहाजा किसी भी जांच में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।

सेमिनार में डॉ. दीपक कालरा, डॉ. विजय प्रकाश आदि ने भी चिकित्सकीय नैतिकता और मरीज-डाक्टर्स सम्बन्धों पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। सेमिनार में सभी चिकित्सकों ने एकमत से चिकित्सक एवं रोगी के मधुर सम्बन्धों को स्वीकार करते हुए यह माना गया कि रोगी की संतुष्टि ही सही मायने में चिकित्सकीय नैतिकता (मेडिकल एथिक्स) है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने संस्कृत के विभिन्न उद्धरणों के माध्यम से किया। आभार चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र कुमार ने माना।

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