मुल्‍ला नसरुद्दीन का आत्‍म ज्ञान

आत्‍म ज्ञान ही एकमात्र ज्ञान है, बाकी सारे ज्ञान जानकारी भर हैं। लेकिन अफसोस कि हम आत्‍म ज्ञान के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं और इसलिए अपने साथ क्‍या हो रहा है, इसका भी पता नहीं रखते।
मुल्‍ला नसरुद्दीन ने एक दिन रोज से कहीं अधिक शराब पी ली थी। जैसे-तैसे वो घर तो जा पहुंचा किंतु घर पहुंचते ही चारपाई पकड़ ली।
रात में किसी वक्‍त लघुशंका के लिए उठने के प्रयास में मुल्‍ला चारपाई से नीचे गिर गया।
गिरते ही जोर से नौकर को अवाज़ दी और बोला- महमूद, देख तो जरा ये धम्म से क्‍या गिरा। बड़े जोरों की आवाज़ हुई है।
महमूद दौड़ा-दौड़ा आया तो उसने देखा कि मुल्‍ला ही चारपाई से नीचे गिरे पड़े हैं।
उसने मुल्‍ला को बताया- मालिक…कुछ और नहीं गिरा, आप ही तो चारपाई से नीचे गिरे पड़े हैं।
इतना सुनना था कि मुल्‍ला चीखा- हाय रे, तभी तो मैं कहूं कि ये सारी पसलियां क्‍यों दर्द कर रही हैं।