साल का दूसरा चंद्रग्रहण आज, भारत में भी दिखाई देगा

शुक्रवार यानी 5 जून को साल का दूसरा चंद्रग्रहण लगने जा रहा है, जो भारत में भी देखा जा सकेगा. इस साल का पहला चंद्रग्रहण 10 जनवरी को लगा था. ये चंद्रगहण 5 जून रात 11 बजकर 15 मिनट पर शुरू होगा और 6 जून शनिवार को 2 बजकर 34 मिनट पर ख़त्म होगा. बताया जा रहा है कि 12 बजकर 54 मिनट में ग्रहण का प्रभाव सबसे ज़्यादा रहेगा.
इसे भारत समेत एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में देखा जा सकेगा.
आज रात होने जा रहा चंद्रग्रहण पीनम्ब्रल यानी उप छाया ग्रहण है. यानी पृथ्वी की मुख्य छाया के बाहर का हिस्सा चांद पर पड़ेगा जिससे उसकी चमक फीकी सी पड़ जाएगी.
क्या आप देख सकेंगे ये चंद्रग्रहण
विज्ञान प्रसार में वरिष्ठ वैज्ञानिक टीवी वेंकटेश्वरन के मुताबिक़, “ये उप छाया ग्रहण है इसलिए ग्रहण का असर बहुत ज़्यादा नहीं दिखेगा. चांद पर सिर्फ हल्की सी परछाई पड़ती दिखेगी, यानी चांद बस थोड़ा-सा मटमैले रंग का दिखाई देगा. साथ ही ये सिर्फ चांद के 58 प्रतिशत हिस्से को कवर करेगा.”
टीवी वेंकटेश्वरन कहते हैं कि ये ग्रहण इतनी आसानी से नहीं दिखेगा. अगर चंद्रग्रहण अपने पूरे प्रभाव में हो और आप बहुत ही ध्यान से देखें. आसमान भी साफ होना चाहिए, तब जाकर आपको चांद के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों की ब्राइटनेस में कुछ अंतर दिखेगा.
पीनम्ब्रल का क्या मतलब है?
टीवी वेंकटेश्वरन के मुताबिक़ पहले ये समझना ज़रूरी है कि दो तरह की छाया होती है. कोई भी वस्तु जो प्रकाश को रोकती है, वो दो तरह की छाया उत्पन्न करेगी. एक जो अंधेरी और घनी होगी, उसे अम्ब्रल छाया कहते हैं. दूसरी वो जो हल्की और फैली हुई होगी, उसे पीनम्ब्रल कहते हैं.
इन दोनों के बीच का अंतर है: अगर आप अम्ब्रल क्षेत्र में खड़े हैं तो पूरा प्रकाश स्रोत कवर हो जाएगा लेकिन यदि आप पीनम्ब्रल क्षेत्र में खड़े हैं तो पूरे प्रकाश स्रोत कवर नहीं होगा.
इसी महीने सूर्य ग्रहण भी
साल 2020 में कुल छह ग्रहण लगने हैं. इनमें से दो सूर्यग्रहण हैं और चार चंद्रग्रहण होंगे. इनमें से एक चंद्रग्रहण इस साल की शुरुआत में 10 जनवरी को लगा था, उसके बाद 5 जून को लगने जा रहा है.
आज होने वाले चंद्रग्रहण के बाद 5 जुलाई और 30 नवंबर को भी चंद्रग्रहण देखा जा सकेगा. इसके अलावा एक सूर्यग्रहण 21 जून होगा और दूसरा 14 दिसंबर को.
कब लगता है चंद्रग्रहण?
सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच में इस तरह आ जाती है कि चांद धरती की छाया से छिप जाता है. यह तभी संभव है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अपनी कक्षा में एक दूसरे के बिल्कुल सीध में हों.
पूर्णिमा के दिन जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इससे चंद्रमा के छाया वाला भाग अंधकारमय रहता है.
जब हम इस स्थिति में धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है. इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है.
-BBC

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