साइंस ने माना कि उपवास सेहत के अलावा ब्रेन के लिए भी फायदेमंद

बस 5 दिन बाद नवरात्रि का त्योहार शुरू होने वाला है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग व्रत और उपवास रखते हैं। कोई मां की आराधना में पूरे 9 दिन का व्रत रखता है तो कोई सिर्फ 2-3 दिन का। कोई व्रत के दौरान सिर्फ लिक्विड चीजों का सेवन करता है तो कोई बिना नमक वाली चीजों का। अब अगर आप सोच रहे हैं कि व्रत-उपवास का सिर्फ धर्म और आस्था से लेना देना है तो ऐसा बिलकुल नहीं है। साइंस ने भी साबित कर दिया है कि फास्टिंग या उपवास रखना सेहत के लिए फायदेमंद है।
वजन घटाने के साथ ही ब्रेन के लिए फायदेमंद है उपवास
आमतौर पर फास्टिंग यानी उपवास अगर कोई व्यक्ति लगातार रख रहा है तो उसकी अवधि 24 से 72 घंटे के बीच हो सकती है। लेकिन इन दिनों इंटरमिटेंट फास्टिंग का भी काफी चलन है। इसमें सिर्फ 2 बार खाना खाया जाता है और फिर 2 मील के बीच 16-17 घंटे का उपवास रखा जाता है। व्रत-उपवास रखने से न सिर्फ वजन कम होता है बल्कि पाचन तंत्र भी हेल्दी बना रहता है और ब्रेन का फंक्शन भी बेहतर तरीके से होता है। उपवास रखने के और कितने फायदे हैं यहां जानें….
ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद
बहुत सी स्टडीज में यह बात साबित हो चुकी है कि उपवास रखने से ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है और यह खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें डायबीटीज होने का रिस्क है। उपवास रखने से इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है।
दिल की सेहत के लिए फायदेमंद
कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि अपने रुटीन में उपवास को शामिल करना आपके दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। 8 सप्ताह तक हर दूसरे दिन फास्टिंग करने से शऱीर में एलडीएल यानी बैड कलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और खून में मौजूद ट्राईग्लिसराइड्स भी 25 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं।
एजिंग के निशान कम कर लंबा जीवन जीने में मददगार
बहुत सी स्टडीज में यह बात साबित हो चुकी है कि उपवास रखने से आपकी उम्र बढ़ती है और जीवन लंबा होता है। शरीर और स्किन पर बढ़ती उम्र यानी एजिंग के निशान भी कम होने लगते हैं। यानी कुल मिलाकर फास्टिंग करने से इंसान का सर्वाइवल रेट बढ़ता है और जीवन भी लंबा होता है।
ऐसे करें फास्टिंग
अपनी लाइफस्टाइल के हिसाब से आप इनमें से फास्टिंग का कोई भी तरीका चुन सकते हैं-
वॉटर फास्टिंग- इसमें कुछ समय के लिए सिर्फ पानी पीया जाता है।
जूस फास्टिंग- कुछ समय के लिए सिर्फ फलों या सब्जियों का जूस पीकर रहना।
इंटरमिटेंट फास्टिंग- कुछ देर या कुछ दिन के लिए दो मील्स के बीच कम से 12 से 16 घंटे का गैप रखा जाता है।
आंशिक फास्टिंग- इसमें खाने-पीने की कुछ चीजें, प्रोसेस्ड फूड, ऐनिमल प्रॉडक्ट्स, कैफीन आदि का सेवन नहीं करते।
कैलरी कंट्रोल- हर दिन कुछ हफ्तों तक कैलरी पर स्ट्रिक्ट कंट्रोल रखा जाता है।
उपवास रखते वक्त जरूरी बातों का रखें ध्यान
– अगर आप डायबीटिक हैं या लो ब्लड शुगर की दिक्कत है तो उपवास रखने से आपकी तबीयत बिगड़ सकती है। लिहाजा डॉक्टर से सलाह लेकर ही उपवास रखें।
– अगर आपको किसी भी तरह की बीमारी है या आप प्रेग्नेंट हैं तो डॉक्टर से पूछे बिना फास्टिंग बिलकुल न करें।
– अगर आप 24 घंटे से ज्यादा देर के लिए फास्टिंग करने की सोच रहे हैं तब भी मेडिकल सुपरविजन में रहकर ही ऐसा करें।
– उपवास के दौरान बहुत ज्यादा मेहनत वाला काम करने से बचें, और ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
-एजेंसियां

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