फर्जी NGO पर अब कसेगा शिकंजा, राज्यसभा से भी पास हुआ बिल

नई दिल्‍ली। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी foreign contribution regulation amendment bill 2020 पास हो गया।
बिल की चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के अरुण सिंह ने कहा कि विगत में ऐसे कई मामले सामने आए जिनमें विदेशों से पैसा किसी और कार्य के लिए आया लेकिन यहां वह निजी ऐशो-आराम और विलासिता में खर्च किया गया।
विदेशी पैसों पर लगेगी लगाम
सिंह ने कहा कि विधेयक के प्रावधानों से विदेशों से आने वाले पैसे की निगरानी में आसानी होगी और दुरुपयोग पर रोक लग सकेगी। उन्होंने पंजीकरण को आधार एवं पासपोर्ट से जोड़ने के कदम का स्वागत किया और कहा कि इससे फर्जी एनजीओ पर अंकुश लग सकेगा।
NGO पर लगेगी लगाम
उन्होंने कहा, ‘अभी ऐसे हजारों NGO हैं जिनका कोई अता-पता नहीं है।’ सिंह ने कहा कि कुछ एनजीओ विदेशों में भारत की छवि खराब करने में भी शामिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ एनजीओ धर्मांतरण में भी लगे रहते हैं। इसके अलावा अलगाववादी ताकतों को भी एनजीओ के माध्यम से पैसे मिलने की बात सामने आती रही है। अन्नाद्रमुक के एस आर बालासुब्रमण्यम ने आशंका जतायी कि सरकार की मंशा अच्छी होने के बाद भी जमीनी स्तर पर इस विधेयक के प्रतिकूल असर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई एनजीओ काफी अच्छा काम कर रहे हैं और ऐसे संगठनों का कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए।
NGO में आएगी पारदर्शिता
जद (यू) के आरसीपी सिंह ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे एनजीओ के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और विदेशी अभिदाय लेने वाले संगठनों की निगरानी में आसानी होगी। सिंह ने भी प्रशासनिक खर्च की सीमा 20 प्रतिशत तक करने को अच्छा कदम बताया।
NGO को हो सकती है परेशानी
मनोनीत सदस्य स्वप्न दासगुप्ता ने एनजीओ के कामकाज पर निगरानी के लिए वृहद आयोग बनाए जाने का सुझाव देते हुए कहा कि उससे स्पष्ट हो सकेगा कि कौन एनजीओ वास्तविक हैं और कौन एनजीओ अन्य कार्यों में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही एसबीआई में खाता खुलने के प्रावधान से दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने वाले एनजीओ को दिक्कतें आ सकती हैं। तेदेपा सदस्य के रवींद्र कुमार ने भी एसबीआई, दिल्ली में ही खाता की अनिवार्यता के प्रावधान को लेकर आशंका जतायी और कहा कि इससे वास्तविक एनजीओ को परेशानी हो सकती है।
-एजेंसियां

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