को-ऑपरेटिव स्कैम में Ajit Pawar के ख‍िलाफ जांच रोकने से SC का इंकार

नई द‍िल्ली। महाराष्‍ट्र स्‍टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में Ajit Pawar को बड़ा झटका लगा है, बैंक घोटाले में FIR दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाने से SC ने इनकार कर द‍िया है।

महाराष्‍ट्र स्‍टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्‍यमंत्री Ajit Pawar और अन्‍य के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के बॉम्‍बे हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है।

करोड़ों रुपये के महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में आरोपी अजित पवार और बाकी अन्य को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी एसएलपी खारिज करते हुए मुंबई हाईकोर्ट के आदेश को सही बताया है। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही जांच को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पुलिस से कहा है कि इस मामले ‘निष्पक्ष और स्वतंत्र’ जांच की जाए।

न्यायमूर्त‍ि अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने इस मामले में उच्च न्यायालय के 22 अगस्त के आदेश को कुछ आरोपियों द्वारा चुनौती दिये जाने की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के आदेश में हस्तक्षेप से इंकार करते हुये कहा कि जांच रोकी नहीं जा सकती है।उच्च न्यायालय के आदेश के एक दिन बाद मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस घोटाले के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की थी।

पीठ ने इन आरोपियों की याचिका का निबटारा करते हुये टिप्पणी की कि यह मामला बहुत बड़ी रकम से जुड़ा है और इसलिए इसकी जांच रोकी नहीं जा सकती। पीठ ने कहा कि इस घोटाले की जांच उच्च न्यायालय के आदेश और उसकी टिप्पणियों से प्रभावित हुये बगैर जारी रहेगी। अजित पवार, कामगार और श्रमिक पार्टी के नेता जयंत पाटिल और बैंक के अनेक पूर्व निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने चीनी मिलों को बेहद कम ब्याज पर कर्ज देते समय और कर्ज चुकता नहीं करने वाले कारोबारियों की संपत्ति को कौड़ियों के दामों पर बेचते समय बैंकिंग और रिजर्व बैंक के नियमों का उल्लंघन किया। साथ ही आरोप है कि इस तरह से संपत्तियों की बिक्री और सस्ती दर पर कर्ज देने तथा ऋण की अदायगी सुनिश्चित करने में विफल रहने की वजह से बैंक को 2007 से 2011 के दरम्यान एक हजार करोड़ रूपए से अधिक का घाटा हुआ।

यह भी आरोप है कि आरोपियों ने बैंक को लाभ दर्शाने के लिये इसके रिकार्ड और आंकड़ों में हेरफेर की। महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार संबंधित अवधि के दौरान बैंक के निदेशक थे। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा की गयी जांच और महाराष्ट्र सहकारी समितियां कानून के तहत अर्द्धशासी न्यायिक जांच आयोग द्वारा दाखिल आरोप पत्र में बैंक को हुये घाटे के लिये अजित पवार और अन्य आरोपियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरिन्दर अरोड़ा ने अजित पवार और अन्य के खिलाफ 2015 में आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दायर की थी। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर उन्होंने अपने वकील एस बी तालेकर के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।- एजेंसी

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