Shelter Homes पर सोशल ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करे बिहार सरकार: SC

नई दिल्‍ली। आज सुप्रीम कोर्ट ने Shelter Homes की स्‍थितियों पर तैयार की गई टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की सोशल ऑडिट रिपोर्ट को सामने लाने के आदेश बिहार सरकार को दिये हैं वहीं कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से भी पूछा है कि देश भर में शेल्टर होम में रहने वाले 1575 बच्चे यौन शोषण के शिकार हुए, इन मामलों में क्या कार्रवाई हुई है?

बिहार के मुजफ्फरपुर में बालिका गृह में 34 लड़कियों से यौन शोषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को “बाल संरक्षण नीति” बनाने पर विचार करने को कहा है। जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा कि देश भर में शेल्टर होम में रहने वाले 1575 बच्चे यौन शोषण के शिकार हुए, इन मामलों में क्या कार्रवाई हुई? केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि कार्रवाई राज्य सरकारों का काम है, उनसे जानकारी लेनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें बताइए कि किन राज्यों ने ज़रूरी कार्रवाई नहीं की। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि शेल्टर होम का सोशल ऑडिट अक्तूबर तक कर लिया जाएगा।

दरअसल, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में रेप के किसी भी मामले में नाबालिग पीड़ित के इंटरव्यू और उसे किसी भी तरह से दिखाने पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने बिहार के मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रय गृह में बच्चियों के बलात्कार मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था। इस मामले में आरोपी की पत्नी के फेसबुक पर पीड़िता के नाम उजागर करने पर कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने और नाम हटाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि NCPCR और राज्य कमीशन रेप पीड़ित से बात कर सकते है, बशर्ते उनके साथ मनोवैज्ञानिक हो. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि हालिया NGO के बारे में किये गए सर्वे के बारे में रिपोर्ट पेश करे।

Shelter Homes को फंड देने पर बिहार सरकार को लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि बिना जांच-पड़ताल कैसे शेल्टर होम को इतने सालों से फंड दे रहे थे? एमिकस क्यूरी ने बताया था कि कई सालों बाद 2017 में सोशल ऑडिट हुआ लेकिन ऑडिट करने वाले वहां के स्टाफ से बात कर निकल गए। बच्चियों से बात ही नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से कई सवाल पूछा था कि NGO को पैसा बिना किसी उचित जांच के दिया गया था, उनकी विश्वनीयता की जांच हुई? कब से पैसा दिया जा रहा है, साल 2004 से आप पैसा दे रहे है, वो भी बिना पड़ताल किए? क्या पीड़ित लड़कियों की कॉउंसलिंग की गई? सिर्फ एक होम का मामला नहीं है, 15 ऐसे होम हैं। बिहार सरकार ने कहा था कि सब पर एक्शन लिया गया है, गिरफ्तारी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से कहा है कि वह राज्य में Shelter Homes की टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा की गई सोशल ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करे। सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने कोर्ट में कहा कि दिल्ली स्थित एम्स समेत तीन संस्थाएं मुजफ्फरपुर के आश्रय गृह में कथित उत्पीड़न का शिकार हुईं लड़कियों के मनोवैज्ञानिक-सामाजिक पहलू की जांच कर रही है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से बाल संरक्षण नीति तैयार करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या आश्रय गृहों में रहने वाले बच्चों का उत्पीड़न हो रहा है, या फिर उनकी सही देखभाल की गई है। शीर्ष न्यायालय ने केंद्र से पूछा है कि उसने देशभर में आश्रय गृहों में रहने वाले 1575 बच्चों के उत्पीड़न मामले में क्या कार्रवाई की है।
-एजेंसी

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