सऊदी की तेल कंपनी अरामको का डेटा लीक, 5 करोड़ डॉलर की मांग

दुनिया की सबसे मूल्यवान तेल उत्पादक कंपनी सऊदी अरामको ने पुष्टि की है कि उनके किसी एक ठेकेदार के ज़रिए कंपनी का डेटा लीक हुआ है.
बताया गया है कि कथित तौर पर इन फ़ाइलों (डेटा) का इस्तेमाल अब कंपनी से पाँच करोड़ डॉलर यानी लगभग 372 करोड़ रुपये की जबरन वसूली के लिए किया जा रहा है.
साइबर सुरक्षा में निवेश ना करने को लेकर तेल और गैस उद्योग से जुड़ी कंपनियों की वैश्विक स्तर पर आलोचना होती रही है.
इसी साल मई में अमेरिका की नामी कंपनी ‘कोलोनियल पाइपलाइन’ पर भी साइबर हमला हुआ था, जिसकी काफ़ी चर्चा रही थी.
अपने बयान में तेल उत्पादक कंपनी आरामको ने बताया कि हमें हाल ही में इस डेटा-चोरी का पता लगा. एक थर्ड-पार्टी ठेकेदार के ज़रिये हमारे डेटा की चोरी की गई.
हालांकि कंपनी ने ये नहीं बताया कि किस ठेकेदार के ज़रिये कंपनी का डेटा चोरी हुआ, और ना ही कंपनी ने इस बारे में कोई जानकारी दी कि डेटा आख़िर चोरी हुआ कैसे?
क्या सिस्टम हैक किये गए या फ़ाइलें चोरी करने के लिए कोई और तरीक़ा अपनाया गया?
कंपनी का कहना है कि “हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि डेटा हमारे सिस्टम से चोरी नहीं हुआ. हमारे संचालन पर भी इस डेटा लीक का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है क्योंकि हमने साइबर सिक्योरिटी के लिए एक बड़ी व्यवस्था बनाई हुई है.”
अमेरिकी समाचार एजेंसी ‘असोसिएटिड प्रेस’ (एपी) के अनुसार सऊदी अरामको कंपनी का एक टेराबाइट यानी एक हज़ार गीगाबाइट साइज़ का डेटा ज़बरन वसूली करने वालों के हाथ लगा है. डार्कनेट पर उन्होंने इसकी जानकारी दी है.
एपी की रिपोर्ट के अनुसार जबरन वसूली करने वालों ने अरामको को ऑफ़र दिया है कि वो पाँच करोड़ डॉलर के बदले में ये डेटा डिलीट कर देंगे. वसूली करने वालों ने ये रकम क्रिप्टोकरेंसी के रूप में माँगी है. हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि फ़िरौती की साज़िश के पीछे किन लोगों का हाथ है.
विशेषज्ञों की मानें तो तेल और गैस उत्पादन के क्षेत्र की कंपनियाँ साइबर सिक्योरिटी पर पर्याप्त पैसा ख़र्च नहीं करती हैं जबकि वर्षों से इस बारे में चर्चा होती रही है और कहा जाता रहा है कि इन कंपनियों को साइबर हमलों से बचने के लिए बेस्ट साइबर सिक्योरिटी के बारे में विचार करना चाहिए.
ये पहली बार नहीं है, जब अरामको को साइबर हमले का निशाना बनाया गया है.
2012 में भी कंपनी का कंप्यूटर नेटवर्क तथाकथित शूमन वायरस की चपेट में आया था.
इस साल भी जब अमेरिकी कंपनी ‘कोलोनियल पाइपलाइन’ पर साइबर हमला हुआ, तो ऊर्जा उद्योग की कंपनियों के कंप्यूटर सिस्टमों की कमज़ोरियाँ दुनिया के सामने आ गईं.
अरामको की सबसे बड़ी शेयर धारक सऊदी अरब की सरकार है.
कंपनी ने इसी साल मार्च में अपने एक बयान में कहा था कि हाल के इतिहास में ये कंपनी के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण सालों में से एक था.
कंपनी के अनुसार साल 2019 में अरामको को जितनी कमाई हुई थी, उसकी तुलना में पिछले साल यानी 2020 में 45 फ़ीसदी का नुक़सान हुआ.
पिछले साल कोरोना महामारी को रोकने के लिए दुनिया भर में जिस तरह पाबंदियाँ लगाई गईं, उसकी वजह से उद्योग बंद हो गए थे, लोगों की यात्राएं स्थगित हो गई थीं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी की कई गतिविधियों में ठहराव आ गया था.
इन सब का असर तेल और ऊर्जा की माँग पर पड़ा और तेल की क़ीमतों में पाँच गुना तक की गिरावट देखी गई.
-एजेंसियां

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