Satyavrat Chaturvedi कांग्रेस पार्टी से निकालेे

क्या सोनिया गांधी को पुत्र मोह नहीं, पार्टी भांग खाकर टिकट बांटती है: Satyavrat Chaturvedi

भोपाल। कांग्रेस ने अपने पूर्व सांसद Satyavrat Chaturvedi को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के आरोप में सत्यव्रत को पार्टी से बाहर किया है। मध्यप्रदेश चुनाव में उन पर अपने बेटे के पक्ष में समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार करने का आरोप है। सत्यव्रत पार्टी प्रवक्ता भी रह चुके हैं।

सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे नितिन चतुर्वेदी इस बार छतरपुर जिले की राजनगर सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. हाल ही में वह अपने बेटे के नामांकन में समर्थकों के साथ पहुंचे थे। इसके अलावा अपने बेटे के लिए वोट भी मांगे थे। उन्होंने कहा था कि अपनी राजनीतिक विरासत बचाना चाहते हैं।

सत्यव्रत चतुर्वेदी संभाग के बड़े ब्राह्मण नेता हैं। वे मध्यप्रदेश में विधायक, मंत्री और सांसद रह चुके हैं। ऐसे में उनके अपने बेटे के समर्थन में उतर आना कांग्रेस के प्रचार अभियान को नुकसान पहुंचा सकता था।

गौरतलब है कि आज ही सत्‍यव्रत चतुर्वेदी ने एक अखबार को दिए इंटरव्‍यू में कहा था कि सोनिया गांधी भी तो पुत्रमोह में हैं। कांग्रेस के पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी अपने बेटे नितिन को छतरपुर जिले की राजनगर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर पार्टी हाईकमान से बेहद खफा हैं। उनका कहना है कि क्या सोनिया गांधी को पुत्र मोह नहीं है। पार्टी भांग खाकर टिकट बांटती है? मैं अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार कर रहा हूं। संगठन मुझे पार्टी से निकाल दे, देर नहीं करे। यह बात चतुर्वेदी ने एक अखबार को दिए इंटरव्‍यू में कहीं।

प्रस्तुत हैं चर्चा के प्रमुख अंश –

– टिकट वितरण को लेकर आपकी नाराजगी है?

– हां, बिल्कुल है।

– आप नाराजगी जताने के लिए क्या करने वाले हैं?

– मेरा बेटा सपा से चुनाव लड़ रहा है। मैं अपने बेटे का प्रचार कर रहा हूं।

– आपका अब पार्टी छोड़ने का विचार है क्या?

– मैं नहीं छोड़ूंगा। पार्टी चाहे तो निकाल दे।

– क्या आप पार्टी को चुनौती दे रहे हैं?
– बिल्कुल। अनुशासनहीनता बताकर, जल्दी निकालें। देर क्यों कर रहे हैं।

– कहा जा रहा है कि पार्टी ने आपको इतना सब कुछ दिया, फिर भी आप नाराज हैं।
– पार्टी ने बहुत कुछ दिया, लेकिन हमने भी पार्टी को वापस दिया है। 45 साल मैंने पार्टी की सेवा की है। मेरे पिता, मेरी मां ने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी है।

– पुत्र मोह के कारण क्या आप नाराज हैं?

– पुत्र मोह क्या सोनिया गांधी को नहीं है।

– आपकी नाराजगी टिकट नहीं मिलने को लेकर है।

– 48 हजार वोटों से जो हारता है, उसको टिकट दिया जा सकता है। 38 हजार 800 वोटों से हारा उसे टिकट मिल सकता है। मेरा बेटा 15 साल से इंतजार कर रहा है। 2008 में नहीं दिया, बोले 2013 में देंगे और 2013 में नहीं दिया और फिर कहा 2018 में देंगे। 2018 में भी मना कर दिया।

आपकी नाराजगी कब तक रहेगी?

– कितनी प्रतीक्षा और करें, कितना धैर्य और दिखाऊं? नाराजगी अपनी जगह है, मैं तो पार्टी को केवल यह साबित करके दिखाना चाहता हूं कि आप लोग भांग खाकर टिकट बांटते हैं। जिसको टिकट दिया है, उसकी इस चुनाव में हैसियत देख लेना। सर्वे हुआ उसमें यह रिपोर्ट आई कि मौजूदा विधायक जीतेगा नहीं। इसके बावजूद उसको टिकट दिया और मेरा बेटा 15 साल से इंतजार कर रहा है। जो तीन-तीन बार पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टियों से कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़े, उनको टिकट दिया। मैं तो केवल जनता के बीच जाकर अपनी बात कह रहा हूं।

जनता की अदालत से फैसला मांग रहा हूं।
-एजेंसी

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