रीजनल Air connectivity बढ़ाने को सिविल सोसायटी करेगी सत्‍यागह

आगरा। सिविल सोसायटी का मुख्‍य लक्ष्‍य आगरा की Air connectivity को बढ़ा कर सहज उपलब्‍धता की स्‍थिति में लाना है।
इसके लिये आगरा सिविल एन्‍कलेव (अब पं दीन दयाल उपाध्‍याय सिविल एन्‍कलेव ) को एअरफोर्स  स्‍टेशन आगरा ( खेरिया) के परिसर से बाहर लाने के प्रयास है। इस काम के लिये पिछले एक दशक से आवाज उठायी जा रही थी किन्‍तु अपेक्षित गति से परिणाम नहीं आ रहे थे किन्‍तु अब काफी जल्‍दी आने की संभावनाये हैं।

नये एन्‍कलेव के लिये जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी

बल्‍हेरा और धनौली गांवों में नये एन्‍कलेव के लिये जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उम्‍मीद की जानी चाहिये कि सितमबर महा तक अधिग्रहित जमीन उ प्र सरकार के द्वारा कार्यदायी एजैंसी एयरपोर्ट अथार्टी आफ इंडिया ( ए ए आई ) को हस्‍तातरित कर दी जायेगी। यही नहीं उसके द्वारा इस पर दीन दयाल उपाध्‍याय सिविल एन्‍कलेव के निर्माण का काम शुरू करवा दिया जायेगा।
जैसा कि सर्व विदित है कि नये सिविल एन्‍कलेव के निर्माण का काम टाटा ग्रुप की एक कंपनी को करना है ,वह इसका टैंडर एएआई से ले चुकी है। उम्‍मीद की जानी चाहिये कि टाटा ग्रुप अपना दायित्‍व तेजी के साथ कार्य कर पूरा करेगा। इस प्रोजैक्‍ट के लिये एएआर के पास जरूरी धन पूर्व से ही चिन्‍हित है, इस लिये उम्‍मीद की जा सकती है कि काम तेजी के साथ अबाध रूप से चलेगा।

सिविल एन्‍कलेव को टी टी जैड की क्‍लीयरैंस

सिविल एन्‍कलेव के इस प्रोजेक्‍ट के लिये सिविल सोसायटी आगरा, सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी के गैर सरकारी सदस्‍य रमन जी के योगदान का उल्‍लेख करना जरूरी मानती है, जिन्‍होंने टीटीजैड अथार्टी में अपनी आधिकारिक रूप से मौजूदगी से दीन दयाल उपाध्‍याय सिविल एन्‍कलेव प्रोजेक्‍ट ( आगरा सिविल एन्‍केलव) को क्‍लीयरैंस दिलवायी। अन्‍यथा श्‍वेत वर्ग के प्रोजेक्‍टों के रूप में इसे चिन्‍हित कर कुछ असरदारों ने तो इसे समाप्‍त ही कर देने का इंतजाम कर डाला था । विधायक जगन प्रसाद गर्ग की सक्रियता भी इस मामले में खास उल्‍लेखनीय है। जैसे ही विधायक जी को जानकारी मिली उन्‍होंने टीटी जैड अथार्टी के चेयरमैन ( मा मंडलायुक्‍त ) को अपना कडा विरोध दज्र करवाया। वस्‍तुस्‍थिति भी यही है कि सिविल एन्‍कलेव का बनायश जाना और आगरा की एयरकनैक्‍टिविटी को प्रभावी किया जाना प्रदूषण नियंत्रण करने वाली श्रेणी के कार्य हैं। हवाई जहाजों की उपलब्‍धता बढने से उस सड़क परिवहन में भारी कमी आ जायेगी जिसे लेकर अब तक उ प्र सरकार और नहीं आगरा विजन बनाने वाला इंस्‍टीटयूट आफ आर्कीटैक्‍ट कोई विकल्‍प या समाधान प्रस्‍तुत कर सका है।

Air connectivity आगरा में की व्‍यापक संभावनायेंं

आगरा में नागरिक उड्डयन बढने की व्‍यापक संभावनाये हैं , पूर्व में यहां सात फ्लाइटें तक आयी भीं । कई एयरलाइंसों ने यहां अपने एजैंट, मैनेजर और आफिस भी रखे। यह वह समय था जबकि भारत में ओपिन स्‍काई पॉलिसी की शुरूआत भी नहीं हो सकी थी। उम्‍मीद थी कि खुली आकाश नीति के बाद जिस प्रकार से एयरलांसों की संख्‍या बढेगी उसी के सापेक्ष आगरा में भी फ्लाइटों का आवागमन बढेगा।

उपयोगी रूटोंं को शर्तें जोड कर घाटे का बनाया गया

किन्‍तु हुआ इसका ठीक उल्‍टा आगरा में शैड्यूल्‍ड फ्लाइटों का टोटा हो गया। आगरा के लिये फ्लाइट शुरू करने वालों को हतोत्‍साहित करने के तौर तरीके अपनाये जा रहे है, कुछ राजनीतिज्ञ पर्दे के पीछे से पिछले चार साल से ताज सिटी के हितोंं के विरुद्ध यह खेल खेल रहे हैंं। हकीकत में वर्ष 2012 कें बाद से आगरा के हित नजरअंदाज किये जाते रहे हैं। दिल्‍ली-आगरा, आगरा -बैंगलूर-चेनई, आगरा गोवा, आगरा -मम्‍बई-पुणे के रूट आप्रेटरोंं के लिये खुले नहीं रखे गये हैं।
सिविल सोसायटी आगरा का मानना है कि रीजनल एयर कनैक्‍टिविटी स्‍कीम के तहत आगरा -जयपुर, आगरा -दिल्‍ली , आगरा अहमदाबाद और आगरा-मुम्‍बई रूट नोटीफाइड किये जायें। आगरा -काठमांडू -वाराणसी रूट को भी निजीक्षेत्र के आप्रेटरों के बीच प्रचारित किया जाये।
इलहाबाद के लिये वायुयान सेवा शुरू की जाये
इनके अलावा हमारी सबसे प्रबल मांग है कि ‘आगरा-गोरखपुर-इलाहाबाद’ के बीच शैड्यूल्‍ड फ्लाइट शुरू की जाये। अगर सरकार की ओर से प्रोहत्‍साहन मिला तो यह रीजनल एयरकनैक्‍टिविटी वाले रूटों में से सबसे अधिक व्‍यस्‍त और मुनाफेवाला रूट साबित होगा। आगरा-इलहाबाद के अधिवक्‍ताओं और वाद कारियों को इससे भारी राहत मिलेगी।

सत्‍याग्रह का सहारा लिया जायेगा
सिविल सोसायटी आगरा कानूनी लडाईयों के अलावा सत्‍यागह में भी विश्‍वास रखती है। आगरा का बेहतरीन Air connectivity वाला होना महानगरी के व्‍यवसायिक और सामाजिक गतिशलता के लिये निहायत जरूरी है। यह एक सत्‍य है और इसके लिये आगह करना ‘सत्‍याग्रह ‘ है। इस बार गांधी जयंती सप्‍ताह के अवसर पर आगरा की Air connectivity बढाने को लेकर सरकार की सुप्‍त सी बनी हुई स्‍थिति को समाप्‍त करने के लिये ‘सत्‍याग्रह ‘ करेगी जिसके तहत जनसहभागिता आधारित वाहन रैली और मानव श्रंखला बनाये जाने जैसे तरीकोंं के अलावा सामूहिक उपवास आदि भी आयोजित करेगी।

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