मुसलमानों को भारत से निकालने के सवाल पर Sardar Patel ने कहा था…

जब Sardar Patel ने कहा- मैं मुसलमानों का सच्‍चा दोस्‍त, पर उन्‍हें देश से वफादारी का प्रमाण पेश करना होगा

नई दिल्ली। मुसलमानों के बारे में सरदार वल्लभभाई पटेल की राय को लेकर उनके जीते जी भी सवाल उठते थे। पिछले कुछ सालों में ये मसला जेरे बहस है इसे लेकर राजनीतिक दलों, मीडिया और सोशल मीडिया पर रस्साकशी होती रहती है।

आइए देखते हैं कि सरदार पटेल ने मुस्लिमों को लेकर क्या कहा है। नीचे हम आपको “लाइफ एंड वर्क्स ऑफ सरदार वल्लभभाई पटेल” में संकलित कुछ अंश पेश कर रहे हैं। इस किताब के प्रधान संपादक थे पीडी सग्गी। पुस्तक में सरदार पटेल के भाषणों और वक्तव्यों का संकलन है।

किताब में उनकी जीवनी और उन पर उनके समकालीनों के विचार भी हैं। किताब की प्रस्तावना में देश के पहले भारतीय गवर्नर जनरल सी राजागोपालचारी ने लिखा है, “वल्लभभाई गांधीजी जी के लिए वहीं थे जो लक्ष्मण श्री राम के लिए थे। जो लोग रामचंद्र और सीता की आराधना करते हैं उनसे इससे ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं।” लौह पुरुष कहे जाने वाले पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात में हुआ था।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नायक रहे पटेल आजादी के बाद देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने।

15 दिसंबर 1950 को सरदार पटेल का निधन हो गया।

साल 2014 से देश में हर साल सरदार पटेल जयंती पर “राष्ट्रीय एकता दिवस” मनाया जाता है। नीचे पढ़ें पटेल के विभिन्न मुद्दों पर विचार।

मुसलमानों की देशभक्ति पर सरदार पटेल-
….अगर नए स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश भारत को एशियाई देशों का नेतृत्व करना है और विदेशी प्रभुत्व को खत्म करना है तो सांप्रदायिक और कारोबारी सौहार्द्र बनाए रखना जरूरी है।

मैं मुसलमानों का सच्चा दोस्त हूं, हालांकि मुझे उनका सबसे बड़ा दुश्मन बताया जाता रहा है। मैं सीधी बात करने में यकीन रखता हूं। मैं उनसे साफ कहना चाहता हूं कि इस नाजुक मोड़ पर केवल भारतीय संघ के प्रति वफादारी की घोषणा से उन्हें मदद नहीं मिलेगी। Sardar Patel ने कहा– उन्हें इसका व्यावहारिक प्रमाण पेश करना होगा।

-एजेंसी