संस्कृति विवि ने गत वर्ष दाखिल किए 45 से अधिक Patent

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2019 के दिसंबर माह तक 45 से अधिक Patent (बौद्धिक संपदा) के मामले दाखिल किए गए जो स्वीकृत होने की प्रक्रिया में हैं। गत वर्ष में विवि के विभिन्न विभागों से जुड़े लगभग एक हजार शोध पत्र जर्नल के लिए तैयार किये गए हैं। शैक्षणिक और शोध की दृष्टि से किसी विवि के द्वारा अर्जित की गई बड़ी सफलता है।

एक हजार से अधिक शोधपत्र हुए तैयार, जर्नल में प्रकाशन के लिए हुए स्वीकृत

विश्वविद्यालय के एक्जीक्यूटिव डाइरेक्टर पीसी छाबड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि विवि द्वारा डोर एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, सिस्टम फार इमेजिंग बाइलोजिकल माइक्रोमोलिक्यूल्स, आटोमैटिक इर्रिगेशन सिस्टम, लिक्विड फ्लो मैनेजमेंट सिस्टम, फाल प्रोटेक्शन सिस्टम, डाइग्नोसिस एंड मैटेनैंस सिस्टम फार आटोमोबाइल्स, काम्पैक्ट इलेक्ट्रिसिटी जनरेटिंग डिवाइस, आप्टीमल पावर जनरेटिंग डिवाइस, एक्जास्ट गैस फिल्ट्रेशन सिस्टम, ड्रायर कम वाटर हीटिंग सिस्टम, क्लोजर सिस्टम फार प्रैशर वैसेल्स, सिस्टम एंड मैथड फार एनहांसिंग सिक्योरिटी क्लाउड कंप्युटिंग, हेल्थ मैनेजमैंट डिवाइस फार एक्वाटिक एनिमल्स, कंटेनर क्लीनिंग एपरेटस, इलेक्ट्रि प्रोपल्सन जेट इंजिन, सिस्टम एंड मैथड फार कंडक्टिंग प्वाइंट आफ सेल ट्रांसेक्शन्स, मैथड फार इन्हेबिशन आफ कोरोसन, आटोमैटिक पैराशूट रिलीज सिस्टम, आटोमैटिक फिल्टर क्लीनिंग डिवाइस जैसे महत्वपूर्ण 45 से अधिक पेटैंट (बौद्धिक संपदा) का स्वामित्व हासिल करने लिए दाखिल किए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों का किसी भी देश की तरक्की में बड़ा योगदान होता है। ये वो स्थान हैं जहां नई-नई खोजों के लिए शोध किए जाते हैं। पेटैंट (बौद्धिक संपदा) कानून इन खोजों के दुरुपयोग को रोकने के लिए संरक्षण प्रदान करता है। विश्व में आज पेटैंट (बौद्धिक संपदा) का महत्व तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का आधार है। अर्थ व्यवस्था के सभी क्षेत्रों में इसका महत्व होने के कारण यह उद्यमों की प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए उत्तरोत्तर प्रासंगिक व महत्वपूर्ण होती जा रही है। पेटैंट (बौद्धिक संपदा) में ऐसी वस्तुएं आती हैं जो व्यक्ति द्वारा बुद्धि के प्रयोग से उत्पन्न होती हैं। किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा सृजित कोई मौलिक कृति, डिजाइन, ट्रेडमार्क इत्यादि बौद्धिक संपदा है। विश्वविद्यालयों द्वारा होने वाली शोध से अर्जित बौद्धिक संपदा का स्वामित्व हासिल करने के लिए पेटैंट कानून के तहत आवेदन किया जाता है। भौतिक धन की तरह ही बौद्धिक संपदा का स्वामित्व लिया जा सकता है। स्वामित्व के लिए बौद्धिक संपदा कानून बनाए गए हैं। इसके अंतर्गत कोई अपनी बौद्धिक संपदा का नियंत्रण कर सकता है और साथ ही उसका उपयोग करके बौद्धिक संपदा अर्जित कर सकता है। किसी विवि द्वारा शिक्षण, प्रशिक्षण, अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत बनाना और बौद्धिक संपदा अधिकारों में कौशल निर्माण करना महत्वपूर्ण कार्य है। संस्कृति विवि ने इस कार्य में गंभीरता बरतते हुए विशेष उपलब्धि हासिल की है।

उन्होंने बताया कि गत वर्ष विवि के एग्रीकल्चर, मैनेजमैंट, इंजीनियरिंग आदि विभागों में एक हजार से अधिक शोध पत्र लिखे गए हैं। ये शोधपत्र जर्नल में प्रकाशित होने के लिए स्वीकृत और स्कोपस (SCOPUS, SCI, SSCI) जर्नल में लिस्टेड हो चुके हैं। ईडी छाबड़ा ने बताया कि संस्कृति विश्वविद्यालय के शिक्षकों की टीम द्वारा लगातार विवि को ऊंचाइयां देने के लिए प्रयास किया जा रहा है। आज विवि अपने अनूठे शैक्षणिक कार्यों के लिए देश में अलग पहचान बना चुका है।

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