संस्कृति यूनिवर्सिटी का इंस्टिट्यूट ऑफ़ Millets रिसर्च से अनुबंध

मथुरा। संस्कृति यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के कृषि एवं बायोटेक्नोलाजी के छात्र-छात्राओं के सपनों को नया आयाम देने के लिए संस्कृति यूनिवर्सिटी के प्रबंधन ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ Millets रिसर्च, हैदराबाद के साथ अनुबंध किया है। संस्कृति यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिल्लेट्स रिसर्च के बीच एमओयू साइन होने से कृषि एवं बायोटेक्नोलाजी में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को ट्रेनिंग और अनुसंधान कार्य में मदद मिलेगी। इस अनुबंध से अब इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिल्लेट्स रिसर्च  के विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के व्याख्यानों से संस्कृति यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राएं लाभान्वित हो सकेंगे।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिल्लेट्स रिसर्च के साथ हुआ अनुबंध संस्कृति यूनिवर्सिटी के कृषि संकाय एवं  बायोटेक्नोलाजी के छात्र-छात्राओं के लिए खुशियों भरा पैगाम साबित हुआ। संस्कृति यूनिवर्सिटी प्रबंधन अपने छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से रूबरू कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी परिप्रेक्ष्य में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत  इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिल्लेट्स रिसर्च  और संस्कृति यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू (अनुबंध) पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस अनुबंध के बाद अब संस्कृति यूनिवर्सिटी के कृषि एवं बायोटेक्नोलाजी के स्नातक और परास्नातक छात्र-छात्राएं इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिल्लेट्स रिसर्च, हैदराबाद   जाकर वहां प्रशिक्षण और अनुसंधान कर सकेंगे। संस्कृति यूनिवर्सिटी और   इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिल्लेट्स रिसर्च  के बीच हुए अनुबंध पर आई  आई एम आर हैदराबाद के निदेशक डा. विलास ए टोनापि और संस्कृति यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. राणा सिंह ने हस्ताक्षर किए।

भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के आई सी ए आर के अंतर्गत वर्ष १९१४ में पूर्ववर्ती डायरेक्टरेट ऑफ़ मेज़ रिसर्च को पुनर्नामित कर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिल्लेट्स रिसर्च के रूप में स्थापित की गई और इस संस्थान का मुख्यालय हैदराबाद में बनाया गया।  इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिल्लेट्स रिसर्च, हैदराबाद  का मुख्य उद्देश्य  मिल्लेट्स यानि बाजरा का विकास, खोज और सर्वेक्षण करना है। यह देश के वैज्ञानिकों से तालमेल रखकर देश के विभिन्न क्षेत्रों से  मिल्लेट्स  संसाधनों को एकत्र करता है। बहुत समय पहले जब इस विषय का संस्थान नहीं बना था तब भी मिल्लेट्स के बारे में शोध आई सी ए आर के अंतर्गत डायरेक्टरेट ऑफ़ मेज़ रिसर्च के अंतर्गत होता था।

दरअसल, कृत्रिम रीति से परागण कराकर मिल्लेट्स के  नए पौधे प्राप्त करने की क्रिया एवं उत्पादकता बढ़ाने के दिशा में यहाँ शोध किया जाता है। इस संस्थान द्वारा किए गए शोध एवं प्रकाशन देश की कृषि क्षेत्र में उन्नति में बहुत ही सहायक है। इस  संस्थान   द्वारा  मिल्लेट्स के ऐसे  पौधों का पर्याप्त विकास किया गया है, जो हर वातावरण में अपने को ठीक रख सकें।

कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने संस्कृति यूनिवर्सिटी और Indian Institute of Millets Research(IIMR) के साथ अनुबंध को संस्कृति यूनिवर्सिटी  की सफलता के पथ में एक  मील का पत्थर करार देते हुए कहा कि इससे युवा पीढ़ी को मिल्लेट्स रिसर्च के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने का भरपूर अवसर मिलेगा। छात्रगण नए एवं आधुनिक तकनीक से परिचित होकर वे स्वयं भी अनुसंधान के क्षेत्र में रुचि लेते हुए कुछ नया करने की ओर अग्रसर होंगे ।

उप-कुलाधिपति राजेश गुप्ता का कहना है कि भारत कृषि प्रधान देश है, ऐसे में संस्कृति यूनिवर्सिटी युवा पीढ़ी को आधुनिक कृषि की आधुनिकतम प्रणाली से परिचित कराकर देश के सर्वांगीण विकास में प्रमुख योगदान देना चाहती है। हमारा प्रयास है कि युवा कृषि को जीविकोपार्जन का जरिया मानते हुए इस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं और कृषि के क्षेत्र में शोध एवं प्रकाशन कर भारत का नाम रौशन करें ।

कुलपति डा. राणा सिंह का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मिल्लेट्स रिसर्च, हैदराबाद के साथ हुए अनुबंध से इससे ब्रज मण्डल, उत्तर प्रदेश एवं आंध्र प्रदेश  के छात्र-छात्राएं ही नहीं, बल्कि अन्य प्रदेशों के छात्र-छात्राएं भी मिल्लेट्स अनुसंधान की तरफ आकर्षित एवं अग्रसर होंगे। आज कृषि क्षेत्र को ऐसी युवा पीढ़ी की दरकार है जोकि कृषि के हर क्षेत्र में शोध कर प्रति एकड़ उत्पादकता बढ़ाएं एवं ऐसे बीजों का उत्पादन करें जिन्हें कम पानी में भी उगाया जा सके ताकि नवीन एवं  उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर भारत विश्व स्तरीय मिल्लेट्स उत्पादन कर सके।

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