संस्कृति विश्वविद्यालय में मना इंजीनियर्स डे

संस्कृति विश्वविद्यालय में मना इंजीनियर्स डे,

कम्पनी की सफलता उसके कर्मचारियों के टीम वर्क पर निहितः अनूप कक्कर

मथुरा। किसी इंडस्ट्री की सफलता उसके कर्मचारियों के टीम वर्क पर निहित है। उद्यमी उपभोक्ता की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को मद्देनजर रख अपने कर्मचारियों के स्किल्स पर विशेष ध्यान देते हैं। जिस कम्पनी में टीम वर्क और कर्मचारियों की स्किल अच्छी होगी, उसका उत्पाद निःसंदेह उपभोक्ता को पसंद आएगा। बाजार में लम्बे समय तक बने रहने के लिए उत्पाद की क्वालिटी का विशेष महत्व है। प्रोडक्ट निर्माण की प्रक्रिया का सुनियोजित होना भी बेहद जरूरी है। यदि निर्माण प्रक्रिया सुनियोजित होगी तो उपभोक्ता को समय से उत्पाद उपलब्ध कराना सहज होगा उक्त सारगर्भित उद्गार 15 सितम्बर शुक्रवार को सोसायटी आफ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स के उत्तर जोन के अधिशाषी निदेशक अनूप कक्कर ने इंजीनियर्स डे पर संस्कृति विश्वविद्यालय की फैकल्टी और इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

श्री कक्कर ने अपने करियर की शुरुआत 1974 में जे.के. सिंथेटिक लिमिटेड कोटा से की थी। वह आईआईटी कानपुर में बतौर कैमिकल इंजीनियर सेवाएं देने के बाद सोसायटी आफ ऑटोमोटिव से जुड़े। सोसायटी आफ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, उसके भारतीय चैप्टर उत्तर जोन के स्टूडेंट कालेजिएट क्लब के स्थापना की नींव आज संस्कृति विश्वविद्यालय में रखी गई। फैकल्टी और इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए श्री कक्कर ने कहा कि ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग का क्षेत्र काफी विस्तृत है। आप वाहन डिजायनिंग, यांत्रिक परीक्षण, वाहन उत्सर्जन, शक्ति यंत्र परीक्षण, धातु विज्ञान प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर दक्षता हासिल कर अपने करियर को नया आयाम दे सकते हैं।

कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक ने भारतरत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को नमन करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का निर्माण पुरुष निरूपित किया। डा. पाठक ने श्री कक्कर का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं को जो टिप्स दिए हैं वे अनुकरणीय हैं। डा. पाठक ने कहा कि आज जो भी तकनीकी विकास हो रहे हैं इसके पीछे सबसे महत्वपूर्ण योगदान ऑटोमोटिव सिस्टम्स इंजीनियर्स का है। इन उन्नत तकनीकों की बदौलत ही वाहन पहले की अपेक्षा कम ईंधन का प्रयोग करने लगे हैं तथा अधिक पर्यावरण हितैषी बनते जा रहे हैं। ऐसे में इंजीनियरिंग, डिजाइन एवं नवीनता में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए यह क्षेत्र खास है। एसोसिएट डीन डा. संजीव कुमार सिंह, हेड कार्पोरेट रिलेशन डा. रामकरन शर्मा, डा. विसेंट बालू, डा. डी.एस. राव, मैनेजर कार्पोरेट रिलेशन तान्या उपाध्याय, विनय आनंद आदि ने श्री कक्कर का संस्कृति विश्वविद्यालय में पधारने पर बुके देकर स्वागत किया। कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक ने श्री कक्कर को स्मृति चिह्न भेंटकर उन्हें पुनः आने का आमंत्रण दिया।