केवल लखनऊ में ही 4299 फ्रॉड ले रहे थे समाजवादी पेंशन, मौत के बाद भी जारी थी पैंशन

लखनऊ। समाजवादी पेंशन योजना की आड़ में लाखों फ्रॉड सरकारी खजाने को खाली करते रहे और अखिलेश सरकार उनके मंसूबे पूरे करती रही। अब ये मामले सामने आने लगे हैं। केवल लखनऊ जिले में ही ऐसे 4299 मामले मिले हैं जिनमें इस योजना के नाम पर अपात्र भी सरकारी खजाने को हर तिमाही 1500 रुपये की चोट पहुंचा रहे थे। पूरे यूपी में यह आंकड़ा ढाई से तीन लाख के बीच पहुंच गया है जबकि अभी आधे जिलों की ही पूरी रिपोर्ट तैयार हो पाई है।
सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद इन सभी से रिकवरी की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
समाजवादी पेंशन योजना में लखनऊ में 84 हजार 865 लोगों को पात्रता सूची में रखे गए थे। योगी सरकार ने अप्रैल में सभी के सत्यापन के निर्देश दिए थे। जिला समाज कल्याण अधिकारी के. एस. मिश्रा ने बताया कि लखनऊ में अब तक 4299 पेंशनर्स अपात्र पाए गए हैं। इनमें से कुछ पेंशनर्स तथ्यों को छुपाकर दोहरी पेंशन ले रहे थे। वहीं कुछ के पास गाड़ी, जमीन और मकान भी हैं। 700 पेंशनर्स तो ऐसे मिले जिनके आलीशान मकान हैं। ऐसे पेंशनरों की अलग रिपोर्ट बनाई जा रही है। 321 ऐसे मामले मिले हैं जिनमें लाभार्थी की मौत हो चुकी है लेकिन घर वालों ने यह बात छुपाए रखी और पेंशन ले रहे थे।
शहरी क्षेत्र में ज्यादा गड़बड़ी: सूत्रों के मुताबिक शहरी क्षेत्र में ज्यादा गड़बड़ियां हैं। कुछ मामले ऐसे हैं जिनमें नेताओं के लेटरपैड पर भी अपात्रों को पेंशन जारी करने की सिफारिश की गई थी। नगर निगम अधिकारियों ने सत्यापन किए बगैर ऐसे लोगों का नाम लाभार्थियों की सूची में लिखवा दिया। शहरी क्षेत्र में ऐसे करीब 1900 अपात्र हैं।
अधिकारी कर रहे ढिलाई!
प्रमुख सचिव-समाज कल्याण ने अप्रैल में आदेश दिया था कि सभी जिले इस पेंशन योजना के लाभार्थियों की सत्यापन रिपोर्ट एक महीने में पेश करें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर समय सीमा बढ़ाकर सितंबर कर दी गई, लेकिन अधिकारियों की ढिलाई के चलते अब तक लखनऊ में भी केवल 70 फीसदी लाभार्थियों का ही सत्यापन हो सका है। 37 जिले ऐसे हैं जिन्होंने आंशिक रिपोर्ट भेजकर चुप्पी साध ली।
03 लाख के करीब अपात्र अब पूरे यूपी में पहचान लिए गए हैं
38 जिलों की सत्यापन रिपोर्ट आ गई है, 37 जिलों की रिपोर्ट अधूरी
500 रुपये हर महीने दिए जाते थे समाजवादी पेंशन योजना में। हर तिमाही 1500 रुपये सीधे बैंक खातों में जाती थी।
-एजेंसी