सालेह ने कहा, अमेरिकी पैसों से तालिबान की मदद करता रहा पाकिस्‍तान

काबुल। अफगानिस्तान के ‘कार्यवाहक’ राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह का कहना है कि उन्हें सैन्य बलों पर गर्व है और सरकार तालिबान-विरोधी आंदोलन को मजबूत करने के लिए पूरी मेहनत करेगी।
एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए सालेह ने पाकिस्तान पर अमेरिकी पैसों से तालिबान की मदद करने के आरोप लगाए। सालेह पंजशीर में हैं, जहां इस वक्त सबसे ज्यादा तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है क्योंकि यह प्रांत तालिबान का ‘प्राइम टारगेट’ है।
अमेरिकी पैसे से तालिबान की मदद
सालेह से पूछा गया कि वह काबुल पर तालिबान के कब्जे के लिए किसे दोषी मानते हैं, इस पर उन्होंने कहा कि स्पष्ट तौर पर तालिबान के ऊपर कोई भी दबाव नहीं था। आतंकी समूह ने पाकिस्तान को अपने ‘सपोर्ट बेस’ की तरह इस्तेमाल किया। पाकिस्तान पूरी तरह तालिबान की मदद करता रहा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान को सहयोग के लिए पैसे भेजता था जिसका इस्तेमाल वह ‘तालिबान समर्थन’ में करता था। अमेरिका जितना पैसा देता रहा, उतना अधिक पाकिस्तान तालिबान को सेवाएं और सहायता मुहैया कराता रहा। यही कारण है कि पश्चिमी सहयोगियों के खिलाफ आतंकवाद और विद्रोह को बढ़ावा देने देश के मुद्दे पर कभी ध्यान नहीं दिया गया।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ तालिबान का धोखा
पाकिस्तान पर पहले भी तालिबान की मदद के आरोप लगते रहे हैं। काबुल पर कब्जे के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि उन्होंने (तालिबान) अफगानिस्तान को गुलामी की जंजीरों से आजाद करा लिया है। सालेह ने कहा कि आतंकी समूह की सफलता का दूसरा कारण दोहा शांति वार्ता थी, जिसने तालिबान को ‘वैध’ रूप दिया और बाद में वह अपने वादों से मुकर गया। आतंकी समूह ने पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ धोखा किया। सालेह तालिबान के आगे सरेंडर करने से इंकार कर चुके हैं। वह अहमद मसूद के नेतृत्व में नॉर्दर्न एलांयस के साथ तालिबान के खिलाफ जंग के लिए तैयार हैं।
फिर सिर उठा सकता है अल-कायदा
अमेरिकी सरकार के सैनिक वापसी के फैसले पर सालेह ने कहा कि इसका संबंध अमेरिकी सेना या खुफिया एजेंसियों से नहीं है। यह सिर्फ एक गलत फैसला था जिसकी कीमत चुकाना अमेरिका शुरू कर चुका है। बता दें कि तालिबान की वापसी के बाद अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन अल-कायदा के एक बार फिर उदय होने का खतरा पैदा हो गया है। ट्रंप प्रशासन में आतंकवाद रोधी महकमे में वरिष्ठ निदेशक रहे क्रिस कोस्टा ने कहा, ‘मेरे ख्याल में अल-कायदा के पास मौका है और वह उस अवसर का फायदा उठाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘अफगानिस्तान में जो हुआ वह हर जगह के जिहादियों को प्रेरित करने वाला घटनाक्रम है।’
-एजेंसियां

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