एक साल में ही ओंधे मुंह गिरी फोर और फाइव स्‍टार AC व फ्रिज की बिक्री

कम बिजली खपत करने वाले AC (एयर कंडीशनर) और रेफ्रिजरेटर्स की बिक्री घटती दिख रही है। सरकार ने हाल में हाउसहोल्ड अप्लायंसेज के लिए एनर्जी एफिशियंसी नॉर्म्स में बदलाव करते हुए इसके मानकों को कड़ा कर दिया था। इसके कारण इन प्रोडक्ट्स की कीमत 20 से 30 पर्सेंट तक बढ़ गई है और कंज्यूमर ने इनसे दूरी बना ली है। इंडस्ट्री बॉडी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीईएएमए) के जुटाए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 15 महीनों में फोर और फाइव स्टार वाले एसी की बिक्री आधे से ज्यादा घट गई है।
2017 में कड़े किए गए नॉर्म्स
अगर रेफ्रिजरेटर की बात करें तो फोर और फाइव स्टार मॉडल्स की बिक्री में 2015 के बाद से ही गिरावट देखने को मिल रही है। 2015 में एनर्जी नार्म्स में संशोधन किया गया था और उसके बाद 2017 में इसे और कड़ा किया गया था, जिसके चलते पिछले साल फाइव स्टार सेगमेंट की मांग लगभग शून्य रही और मैन्युफैक्चरर्स को इसका प्रोडक्शन बंद करने को मजबूर होना पड़ा।
‘बढ़ी मैन्युफैक्चरिंग लागत’
सीईएएमए के प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड कमल नंदी ने बताया, ‘एनर्जी रेटिंग्स ने कंज्यूमर और एनर्जी को बचाने के लिहाज से काफी अच्छा काम किया है, लेकिन इसने मैन्युफैक्चरिंग लागत और कीमतों को बढ़ाया है। इससे ज्यादा एनर्जी रेटिंग वाले प्रोडक्ट्स की पूरी क्षमता के साथ बिक्री नहीं हो पा रही है।’
कीमत में काफी अंतर
प्रमुख रिटेल चेन विजय सेल्स के डायरेक्टर नीलेश गुप्ता ने बताया कि एसी के 3 स्टार और 5 स्टार मॉडल के बीच पहले 4,000-5,000 से रुपये का अंतर था, जो अब दोगुना होकर 8,000-10,000 रुपये हो गया है। उन्होंने बताया, ‘रेफ्रिजरेटर के मामले में कंज्यूमर 3 स्टार मॉडल खरीदना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें बिजली के खपत के मामले में ज्यादा अंतर नहीं दिखता है।’
81 फीसदी एसी 3 स्टार रेटिंग वाले
इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक AC की कुल बिक्री में 81 पर्सेंट हिस्सा 3 स्टार एनर्जी रेटिंग वाले मॉडल्स का है, जो दो साल पहले 58 पर्सेंट था। इस कैटिगरी में 18 पर्सेंट की सेल्स ग्रोथ देखी जा रही है। इसके उलट फाइव स्टार मॉडल का AC की कुल बिक्री में हिस्सा 20 पर्सेंट से घटकर 12 पर्सेंट पर आ गया है और इस सेगमेंट में बिक्री 24 पर्सेंट की दर से घट रही है। 2016 में रेफ्रिजरेटर की कुल बिक्री में 4 स्टार मॉडल का 45 पर्सेंट योगदान था, जो पिछले साल घटकर 22% हो गया। वहीं 5 स्टार मॉडल का 2016 में कुल बिक्री में योगादन 23 पर्सेंट था, जो अब शून्य हो गया है।
‘अबका 3 स्टार पहले 5 स्टार’
ऊर्जा मंत्रालय की अगुवाई वाला ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशियंसी (बीईई) देश में हाउसहोल्ड अप्लायंसेज के लिए रेटिंग नॉर्म्स बनाता है। बीईई के डायरेक्टर जनरल अभय बाकरे ने बताया कि एसी जैसे अप्लायंसेज बहुत ज्यादा बिजली का खपत करते हैं। उन्होंने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए हम देश में एनर्जी नॉर्म्स को कड़ा करना जारी रखेंगे। बाकरे ने बताया, ‘अगर कंज्यूमर तीन स्टार रेटिंग वाले मॉडल खरीद रहे हैं, तब भी यह काफी अच्छा है क्योंकि 2017 से पहले ये 5 स्टार रेटिंग वाले प्रोडक्ट होते थे।’
-एजेंसियां

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