SAJA की सलाह, कोरोना के नए स्‍ट्रेन को ‘इंडिया वैरियंट’ न बताए मीडिया

नई दिल्‍ली। साउथ एशियन जर्नलिस्‍ट्स एसोसिएशन SAJA ने मीडिया संस्‍थानों से कोरोना के नए स्‍ट्रेन के बारे में बताते वक्‍त सावधानी बरतने के लिए कहा है। उसने सुझाव दिया है कि इसके लिए ‘इंडिया वैरियंट’ या ‘इंडियन वैरियंट’ शब्‍द का इस्‍तेमाल न किया जाए। कहा जाता है कि कोरोना के इस नए किस्‍म की उत्‍पत्ति भारत में हुई है।
एसोसिएशन ने कहा कि उसका सुझाव विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन WHO की ओर से 2015 में जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। ये वायरस या वैरियंट का नाम उस देश पर रखने से रोकते हैं जहां से इसकी शुरुआत होती है।
SAJA ने कहा कि पिछले कई सालों में तमाम बीमारियों के नाम ने किसी खास धर्म के लोगों या समुदायों के खिलाफ माहौल तैयार किया। कोविड-19 इसका सबसे ताजा उदाहरण है। इसकी पहचान सबसे पहले वुहान में हुई थी। इससे ‘चाइना वायरस’ या ‘वुहान वायरस’ जैसे शब्‍द चलन में आए। हेल्‍थ एक्‍सपर्ट और जानकारों का कहना है कि हाल में एशियाई अमेरिकियों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ने का यह मुख्‍य कारण रहा है।
एसोसिएशन ने मीडिया संस्‍थानों और पत्रकारों को सलाह दी है कि भारत में कोरोना के संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के कवरेज को लेकर वे सावधानी बरतें। उसने कहा है कि वह दक्षिण एशियाई समुदाय के निष्‍पक्ष और सटीक कवरेज के लिए उपलब्‍ध है।
अभी बी.1.617 और बी.1 प्रमुख स्‍ट्रेन हैं जिनकी पहचान दक्षिण भारत से लिए गए सैंपलों में हुई है। कोरोना के इस स्‍ट्रेन में संक्रमित करने की क्षमता बहुत ज्‍यादा है। यह बुजुर्गों के अलावा युवाओं में भी फैल रहा है।
-एजेंसियां

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