Sadhvi निरंजन ज्योति बनीं महामंडलेश्वर, निरंजनी अखाड़े ने दी पदवी

प्रयागराज। केंद्रीय मंत्री Sadhvi निरंजन ज्योति शाही स्नान से एक दिन पहले सोमवार को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की महामंडलेश्वर बनीं।  ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी मंत्री को यह उपाधि दी गई है। 13 अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर की मौजूदगी में Sadhvi निरंजन ज्योति का पट्टाभिषेक किया गया।

अखाड़े की छावनी में ‘चादरविधि’ के तहत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी सौंपी गई। पुरोहितों की ओर से स्वस्ति वाचन से श्रीशुद्धि के बाद उनका पट्टाभिषेक किया गया।

अखाड़े की सोलहवीं महिला महामंडलेश्वर हैं निरंजन ज्योति
अभिषेक के बाद Sadhvi निरंजन ज्योति निरंजनी अखाड़े की सोलहवीं महिला महामंडलेश्वर बन गईं। बीते कुंभ पर्व में भी पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी ने महिला संत स्वामी निर्भयानंद पुरी को महामंडलेश्वर की पदवी सौंपी थी। अब तक निरंजनी में संतोषी गिरि, संतोषानंद सरस्वती, मां अमृतामयी, योग शक्ति सहित 15 महिला महामंडलेश्वर शामिल थीं।

परमानंद गिरी की शिष्या भी हैं साध्वी निरंजन ज्योति
सुबह 11 बजे कुंभ मेले क्षेत्र में निरंजनी अखाड़े की छावनी में सभी 13 अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर की मौजूदगी में साध्वी निरंजन ज्योति का पट्टाभिषेक किया गया। इसके बाद उन्हें महामंडलेश्वर की पदवी निरंजनी अखाड़े की ओर से दी गई।

निरंजनी अखाड़े के श्री महंत और अखिल भारतीय अखाड़े के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी के मुताबिक, साध्वी निरंजन ज्योति साध्वी पहले हैं और केन्द्रीय मंत्री बाद में। साध्वी निरंजन ज्योति निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर परमानंद गिरी की शिष्या भी हैं।

महामंडलेश्वर बनने के लिए ज़रूरी योग्यता

व्यक्ति में वैराग्य होना चाहिए,
संन्यास होना चाहिए,
न घर-परिवार और न ही पारिवारिक संबंध होने चाहिए,
आयु का कोई बंधन नहीं,
संस्कृत, वेद-पुराणों का ज्ञान ज़रूरी, कथा कहें, प्रवचन दें,
कोई व्यक्ति या तो बचपन में अथवा जीवन के चौथे चरण यानी वानप्रस्थाश्रम में महामंडलेश्वर बन सकता है,
अखाड़ों में परीक्षा ली जाती है।

महामंडलेश्वर के काम 
सनातन धर्म का प्रचार देश के कोने कोने में करना,
अपने ज्ञान का प्रकाश फैलाना,
भटके लोगों को मानवता की सही राह दिखाना।

महामंडलेश्वर बनने के फ़ायदे 
शिष्य बनते हैं,
लोगों से जु़ड़ाव,
समाज में उठना बैठना, घूमना-फिरना,
कोई आर्थिक लाभ नहीं,
कुंभ के शाही स्नान में महामंडलेश्वर रथ पर सवार होकर निकलते हैं,
महामंडलेश्वर के लिए कुंभ में वीआईपी व्यवस्था,
सुरक्षा के अलग प्रबंध,
आगे पीछे नेताओं,अधिकारियों का जमघट।

कुंभ में शामिल अखाड़े
कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य ने आठवीं सदी में 13 अखाड़े बनाए थे. आज तक वही अखाड़े बने हुए हैं।

-एजेंसी

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