Ujjain को आदर्श पवित्र नगरी घोषित किए जाने को लेकर साधू संतों का अनशन

उज्जैन। दुनियाभर में महाकाल मंदिर की नगरी के नाम से प्रसिद्ध Ujjain नगरी को आदर्श पवित्र नगरी घोषित किए जाने को लेकर भारी संख्या में संत समाज आगे आया है. संत समाज का कहना है कि Ujjain को आधिकारिक रूप से पवित्र नगरी का दर्जा दिया जाना चाहिए ताकि यहां सात्विकता को बढ़ावा दिया जा सके. इसके लिए ऊर्जा गुरु अरिहंत ऋषि के मार्गदर्शन में क्रमिक आंदोलन की शुरुआत भी हो चुकी है. इसी क्रम में गुरुवार को उज्जैन के शर्मा परिसर में सुबह 7:30 से दोपहर 2:30 बजे तक उज्जैन एवं अन्य जगहों से आए सैकड़ों की संख्या में साधू संत अनशन पर बैठ गए. 
 
इस अनशन में महामना आचार्य कुशाग्रनंदीजी समेत अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव, विश्व हिन्दू परिषद् के मार्गदर्शक और ऊर्जा वर्ल्ड फाउंडेशन के संस्थापक ऊर्जा गुरु अरिहंत ऋषि और अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं विश्व हिन्दू परिषद् के मार्गदर्शक मंडल के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती भी मौजूद रहे. 
 
इस दौरान संतों को संबोधित करते हुए ऊर्जा गुरु अरिहंत ऋषि ने कहा कि, राज्य सरकार की लापरवाही और सनातन धर्म की अनदेखी की वजह से महाकाल की धार्मिक नगरी में मांस-मदिरा का उपभोग और कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है. अब तो मंदिर परिसर के समीप भी इस कारोबार को धड़ल्ले से चलाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस अभियान को राम द्वारे मंदिर के संत पतीत राम स्नेही ने वर्षों पहले शुरू किया था. हालांकि उन वक्त भी किसी ने इस विषय पर ध्यान नहीं दिया. इसलिए इस मुहीम को एक बार फिर संतो और महंतो के नेतृत्व में दुबारा शुरू किया गया है.
 
पिछले दिनों संतों ने अपनी आवाज मुख्यमंत्री कमलनाथ तक पहुंचाने के लिए उन्हें अपने रक्त से पत्र लिख हस्ताक्षर किए थे. इसके आलावा आम नागरिकों व श्रद्धालुओं का समर्थन जुटाने के लिए हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत भी की है. इसके लिए एक लाख से अधिक लोगो के हस्ताक्षर लेकर ऊपरी प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा.  

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