सद्गुरु ने अमेरिका में सड़क द्वारा आध्यात्मिक यात्रा शुरु की

एक धरती की विरासत का इसके लोगों पर क्या असर पड़ता है? सदियों पुरानी मानवीय पीड़ा किस तरह वर्तमान और भविष्य को प्रभावित करती है? ऐसे असुविधाजनक सवालों का जवाब बिरले ही देने की कोशिश करेंगे – जब तक कि आप जीवन की गहरी समझ रखने वाले एक रहस्यवादी न हों, और यह न जानते हों कि यह जीवित पृथ्वी, हर चीज जिसका यह पोषण करती है, उन पर पड़े असर का यह किस तरह एक सतत परस्पर प्रभाव है।

एक 6000 मील की यात्रा के दौरान, सद्गुरु (Sadguru Jaggi Vasudeva)  टेनेसी से शुरू करके 15 राज्यों से होकर गुजरेंगे और अंदरूनी और बाहरी परिदृष्य की खोजबीन करते हुए वहां के मूल अमेरिकी लोगों के जीवन, इतिहास, और संस्कृति का पता लगाएंगे। ‘मोटरसाइकिलों और मिस्टिक की दुनिया’ नाम की यात्रा, वहां पर यूरोपीय लोगों के आने से पहले, 15वीं सदी के मूल अमेरिकी निवासियों की विरासत की एक खोज-यात्रा है। उपनिवेशकों के आने पर, अमेरिका ने दुनिया का अपनी धरती पर स्वागत किया, और एक मजबूत राष्ट्र निर्माण का, नई खोजों, वाणिज्य, साहसिक कार्यों और सृजनात्मकता का 200 वर्षों से भी अधिक लंबा राष्ट्रीय इतिहास लिखा।

सद्गुरु ने मूल अमेरिकी धरती से अपने गहन संबंध को उजागर किया। ‘मैं इस धरती की ओर इसकी सुंदरता के लिए आकर्षित नहीं हुआ, बल्कि इसकी पीड़ा की ओर आकर्षित हुआ। 1999 में, मैं सेंट्रल हिल लेक पर था और मेरा सामना जमी हुई एक आत्मा से हुआ, जिससे पीड़ा रिस रही थी। तब मैंने गौर करना शुरू किया कि इस धरती के कई हिस्सों में कितनी अधिक गहरी पीड़ा की भावना मौजूद है। हम चाहे इसके बारे में जागरूक हों या न हों, वह मानव जीवन को प्रभावित करेगी। अव्यक्त पीड़ा बिना किसी कारण के घटित होगी,’ सद्गुरु ने कहा, जिन्होंने कंबरलैंड पठार पर ईशा इंस्टिट्यूट ऑफ इनर साइंसेज़ स्थापित किया है।

‘काफी बाद में मुझे पता चला कि ऐतिहासिक रूप से इसे आंसुओं की लकीर कहते हैं,’ उन्होंने इस क्षेत्र के बारे में संकेत किया। ‘जैसा कि हमने कई जगहों पर देखा है, जो लोग अपने आस-पास की चीजों के साथ तालमेल में हैं, उन लोगों के गुण, चाहे वह खुशी हो या पीड़ा, चाहे वे बैठें या खड़े रहें, वह आस-पास मंडराता रहता है।’

सद्गुरु की महीने भर की यात्रा मूल सांस्कृतिक विविधता पर एक खोज का प्रयास है, जिसने सदियों से लोगों का ध्यान, सिर्फ अमेरिका में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में खींचा है। मूल अमेरिकी लोगों में, जो भौतिक तत्वों के साथ नजदीकी संबंध के लिए जाने जाते हैं, एक सहज समझ और उच्च स्तरीय बोध है जो उनकी अनोखी संस्कृति के हर पहलू को संचालित करता है। सद्गुरु की यात्रा भारतीय रहस्यवाद और मूल अमेरिकी रहस्यवाद के बीच समानता की खोज करेगी। इन दोनों का आधार, तत्वों में गहराई से स्थापित है।

सद्गुरु ने अपनी यात्रा आज महालय अमावस्या के दिन शुरू की है जो पूर्वजों को याद करने का पवित्र दिन है। ईशा इंस्टिट्यूट ऑफ इनर साइंसेज़ से शुरू होकर, सद्गुरु की यात्रा चेरोकी लैंड्स, कोमांचे कंट्री, और विशाल मिसिसिपी नदी से होकर इलिनॉय, मिसौरी, न्यू मेक्सिको, कोलोरैडो राज्यों से घूमती हुई वापस टेनेसी आएगी। दुनिया भर के लोग इस रहस्यमय यात्रा की नवीनतम विशिष्ट जानकारी के लिए सद्गुरु मोबाइल ऐप पर ट्यून कर सकते हैं।

यूएस के सेंसस-ब्यूरो के अनुसार, मूल अमेरिकी और मूल अलास्कन, अमेरिकी आबादी का 1.5 प्रतिशत हैं, जिनकी संख्या लगभग 45 लाख के करीब है।

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