हाथ में गीता लेकर फांसी चढ़ने वाले खुदीराम का बलिदान दिवस

आज ही के दिन सन 1908 को भारत के महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस को फांसी के तख्ते पर लटका दिया गया था। ब्रिटिश साम्राज्य से भारत की आजादी के संघर्ष में खुदीराम के इस बलिदान को आज पूरा देश याद कर रहा है। जाने-माने कवि कुमार विश्वास ने भी ट्विटर पर इस महान वीर को याद किया है। उन्होंने खुदीराम बोस की तस्वीर शेयर कर लिखा, ‘शेर ए हिंद खुदीराम बोस! आज के दिन ही आजादी की बारात लेकर मौत को अपनी दुल्हन बनाने निकला था! आजादी की बलिवेदी पर चढ़ा सबसे कमसिन फूल!’
18 साल की उम्र में चढ़े फांसीदरअसल, देश की आजादी की लड़ाई में कुछ नौजवानों का बलिदान इतना उद्वेलित करने वाला था कि उसने पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम का रुख बदलकर रख दिया। इनमें एक नाम खुदीराम बोस का है। जब अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दी, उस समय उनकी उम्र महज 18 साल कुछ महीने थी। अंग्रेज सरकार उनकी निडरता और वीरता से इस कदर आतंकित थी कि उनकी कम उम्र के बावजूद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई।
बंगाल के नौजवानों की प्रेरणा स्त्रोत बने खुदीराम
यह साहसी किशोर हाथ में गीता लेकर खुशी-खुशी फांसी चढ़ गया। खुदीराम की लोकप्रियता का यह आलम था कि उनको फांसी दिए जाने के बाद बंगाल के जुलाहे एक खास किस्म की धोती बुनने लगे, जिसकी किनारी पर खुदीराम लिखा होता था और बंगाल के नौजवान बड़े गर्व से वह धोती पहनकर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।
कवि कुमार विश्वास ने ट्वीट में आगे लिखा, ‘लव यू हीरो (हमारे महानायक हम आपको प्यार करते हैं)।’ उन्होंने खुदीराम बोस का गीत एक बार विदाई दे मा घुरे असी, हसी हसी पोरबो फांसी, देखबे भारतबासी भी ट्वीट किया। इसका मतलब है- ओ मां, मुझे एकबार विदा दो तुरंत घूमकर आता हूं, हंसता हंसता फांसी के फंदे पर चढ़ जाऊंगा और सारे भारतवासी देखेंगे।
किंग्सफोर्ड पर फेंका था बम
खुदीराम बोस ने कोलकाता के मजिस्ट्रेट डगलस एच. किंग्सफोर्ड की बग्घी पर 30 अप्रैल, 1908 को बम फेंकी थी। इस काम में उन्हें प्रफुल्ल चंद्र चाकी का सहयोग मिला। दोनों क्रांतिकारियों ने किंग्सफोर्ड का पीछा करते हुए बंगाल के मेदिनीपुर से बिहार के मजुफ्फरपुर की पैदल यात्रा की। बम फेंकने के बाद दोनों साथी अंधेरे में भाग निकले। समस्तीपुर के रास्ते में 24 मील तक भागने पर छोटे से स्टेशन वैनी के पास घूमते दो सिपाही ने दोनों को पहचान लिया और काफी पीछा करने के बाद पकड़ लिया। खुदीराम को मुजफ्फरपुर में ही फांसी दी गई।
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *