पंडोरा पेपर्स लीक में 300 भारतीयों के साथ सचिन तेंदुलकर का भी नाम

गुप्त वित्तीय लेन-देन और कारोबार पर पंडोरा पेपर्स लीक को अब तक का सबसे बड़ा खुलासा करार दिया गया है। पंडोरा पेपर्स लीक में 300 भारतीयों के नाम सामने आए हैं, जिनमें क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का नाम भी शामिल है। ‘इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स’ (International Consortium of Investigative Journalists – ICIJ) ने 1.19 करोड़ से अधिक दस्तावेजों की जांच की, जिसमें पाया गया कि पनामा पेपर लीक के बाद भारतीयों ने अपनी संपत्ति को ‘रीऑर्गनाइज’ करना शुरू कर दिया। सचिन तेंदुलकर भी लीक के तीन महीने बाद ही ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में अपनी संपत्ति के लिक्विडेशन में जुट गए थे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पंडोरा पेपर्स की जांच में खुलासा हुआ है कि सचिन तेंदुलकर, उनकी पत्नी अंजलि तेंदुलकर और अंजलि के पिता आनंद मेहता ब्रिटिश वर्जिन आयलैंड्स में एक विदेशी संपत्ति के बेनिफीशियल ओनर थे। इस संपत्ति को साल 2016 में लिक्विडेट कर दिया गया और 26.8 लाख डॉलर के शेयरों का बायबैक कर लिया गया।
​क्या कहते हैं पनामा लॉ फर्म एल्कोगल के रिकॉर्ड
पनामा लॉ फर्म एल्कोगल के रिकॉर्ड की जांच के अनुसार सचिन, उनकी पत्नी अंजलि और ससुर आनंद मेहता का नाम ब्रिटिश वर्जिन आयलैंड्स में स्थित कंपनी ‘सास इंटरनेशनल लिमिटेड’ के बीओ और निदेशक के रूप में नामित किया गया था। डेटा पनामा की कानूनी फर्म, एल्कोगल के दस्तावेजों का हिस्सा है जिसमें उनकी कंपनी एलजे मैनेजमेंट (सुइस) द्वारा इनकॉरपोरेट की गई। पंडोरा रिकॉर्ड्स में सास का पहला संदर्भ 2007 का है। कंपनी के मालिकों के लिए वित्तीय लाभ के साथ दस्तावेजों का सबसे विस्तृत सेट जुलाई 2016 में कंपनी के लिक्विडेशन के समय से उपलब्ध है। कंपनी के लिक्विडेशन के समय इसके शेयर, शेयरधारकों द्वारा इन सूचीबद्ध मूल्य के अनुरूप वापस खरीदे गए थे:
·सचिन तेंदुलकर (9 शेयर): 856,702 डॉलर
·अंजलि तेंदुलकर (14 शेयर): 1,375,714 डॉलर
·आनंद मेहता (5 शेयर): 453,082 डॉलर
इस तरह सास इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों का औसत बायबैक मूल्य लगभग 96,000 डॉलर है। और जैसा कि 10 अगस्त 2007 (जिस दिन कंपनी बनी थी) के कंपनी के एक रिजॉल्यूशन से पता चलता है, कंपनी के 90 शेयर शुरुआत में जारी किए गए थे। अंजलि तेंदुलकर को 60 शेयरों के साथ पहला शेयर सर्टिफिकेट मिला; उनके पिता को 30 शेयरों के साथ दूसरा शेयर सर्टिफिकेट मिला। शेष शेयरों के बायबैक का कोई विवरण नहीं है।
डिसॉल्यूशन की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2016
सास इंटरनेशनल लिमिटेड के विघटन (Dissolution) की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2016 दी गई है। विघटन के लिए शेयरधारकों के प्रस्ताव पर इसके तीनों शेयरधारकों सचिन तेंदुलकर, अंजलि तेंदुलकर और आनंद मेहता द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं। म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस (एमएलए) अधिनियम 2003 के नियमों के अनुसार, इसके बारे में भी विवरण है कि सास इंटरनेशनल लिमिटेड के लिक्विडेशन के बाद “रिकॉर्ड्स की लोकेशन और अंतर्निहित दस्तावेज” कहां होंगे।
​सारे निवेश वैध, टैक्स रिटर्न में किया गया है खुलासा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के सीईओ और निदेशक मृणमय मुखर्जी का कहना है कि तेंदुलकर द्वारा संदर्भित निवेश, उनके टैक्स पेड फंड्स से लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत किया गया है। इसका विधिवत लेखा है और इसे उनके टैक्स रिटर्न में घोषित किया गया है। सचिन तेंदुलकर के मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। तेंदुलकर द्वारा निवेश वैध रूप से भारत से बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किया गया है और आयकर अधिकारियों को घोषित किया गया है। निवेश के लिक्विडेशन पर तेंदुलकर को मिली धनराशि को भी उनके टैक्स रिटर्न में घोषित किया गया है।
-एजेंसियां

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