Sabrimala केस पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार, 49 अर्जियों पर खुली अदालत में होगी सुनवाई

नई दिल्‍ली। Sabrimala मंदिर मामले में अपने ही फैसले के खिलाफ आईं सभी 49 अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट ने खुली अदालत में सुनवाई करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट में Sabrimala मंदिर मामले में दिए गए सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिए जाने के फैसले पर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई होगी।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने Sabrimala मंदिर पर जारी विवाद को लेकर सुनवाई के दौरान कहा था कि कोर्ट के आदेश की समीक्षा की मांग करने वाली याचिकाओं पर फैसले के बाद ही नई याचिकाओं पर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह स्पष्ट कर दिया कि सबरीमला मंदिर से जुड़ी नई याचिकाओं पर सुनवाई तभी होगी जब वह मंदिर में सभी वायु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने संबंधी उसके फैसले की समीक्षा चाहने वाली पुरानी याचिकाओं का निपटारा कर देगा।

लगभग 49 याचिकार्ताओं ने कोर्ट से अपने पूर्ववर्ती फैसले पर दोबारा से विचार करने का आग्रह किया था। बता दें कि कोर्ट ने लगभग दो महीने पहले सभी उम्र की महिलाओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए थे। इस फैसले का दक्षिण पंथी कार्यकर्ता लगातार विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सदियो से चली आ रही परंपरा के खिलाफ आए कोर्ट के फैसले को मानने से इंकार कर दिया है।

याचिकार्ताओं का तर्क है कि आस्था को वैज्ञानिक ढंग द्वारा तय नहीं किया जा सकता है। उनका कहना है कि प्रजनन की उम्र वाली महिलाओं को इसलिए मंदिर में आने की इजाजत नहीं है क्योंकि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे। केरला के मंदिर मामलों के मंत्री कदाकमपल्ली सुरेंद्रन ने सोमवार को कहा था, ‘सरकार खुले दिमाग की है। हम सबरीमाला के मामले पर बातचीत करने के लिए सभी पार्टियों को बुलाएंगे। पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद हम इसकी तारीख और समय का फैसला करेंगे।’

भाजपा ने जहां सबरीमाला अभियान को तेज कर दिया है। वहीं कांग्रेस ने परिस्थिति से ठीक तरह से न निपटने और प्रदर्शनकारियों का साथ देने का आरोप लगाते हुए केरल सरकार की आलोचना की है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार ने इस बात को दोहराया था कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा 28 सितंबर को दिए फैसले को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन उसने इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के लिए प्रतिद्वंदी पार्टियों पर आरोप लगाया है। भाजपा के राज्य अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई ने मंदिर के रीति-रिवाजों को बचाने के लिए रथ यात्रा पर हैं।

उल्लेखनीय है कि तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 28 सितंबर को 4:1 के बहुमत से अपना फैसला दिया था। फैसले पर पुनर्विचार के लिए 49 याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की पीठ 22 जनवरी को सुनवाई करेगी।

-एजेंसी

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