सबरीमला में प्रवेश के लिए पहुंची तृप्‍ति को श्रद्धालुओं ने हवाई अड्डे पर ही रोका

महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई 800 साल पुराने सबरीमला मंदिर में प्रवेश के लिए पहुंची हैं, लेकिन अपने समर्थकों के साथ वो अभी कोच्चि हवाई अड्डे पर ही फंसी हुई हैं.
श्रद्धालुओं ने हवाई अड्डे से बाहर निकलने के रास्ते को बंद कर दिया है ताकि तृप्ति और दूसरी छह महिलाएं सबरीमला तक न पहुंच सकें.
तृप्ति और उनकी साथी महिलाएं आज तड़के 4.30 बजे ही हवाई अड्डे पहुंच गई थीं लेकिन वहां उन्हें एक भी टैक्सी नहीं मिली जो सबरीमला तक ले जा सके.
तृप्ति ने कहा, “टैक्सी वालों को डर था कि लोग उन पर हमला करके गाड़ी को नुकसान पहुंचा देंगे.”
केरल के सबरीमला मंदिर के दरवाज़े शुक्रवार शाम 5 बजे से खुल रहे हैं. इसी के साथ मंदिर में 64 दिनों तक दर्शन का बेहद अहम समय शुरू हो जाएगा.
तृप्ति देसाई पहले महाराष्ट्र के शनि शिंगापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के आंदोलन की अगुवाई कर चुकी हैं. वहां भी उन्हें रोकने की कोशिशें हुई थीं.
तृप्ति को सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने से रोक रहे श्रद्धालु इस परंपरा में यक़ीन रखते हैं कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं इसलिए उनके मंदिर में मासिक धर्म के उम्र वाली कोई महिला प्रवेश नहीं कर सकती जबकि सुप्रीम कोर्ट ने बीते 28 सितंबर को महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाज़त दे दी थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार के लिए तैयार हो गया है.
800 महिलाओं ने किया प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन
तृप्ति इस बात से संतुष्ट हैं कि केरल पुलिस ने 150 पुलिसकर्मियों को उनकी सुरक्षा के लिए हवाई अड्डे पर तैनात किया है. उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझे कुछ देर इंतज़ार करने के लिए कहा है. फिर वे मुझे पतनमथिट्टा ले जाएंगे, जहां से हम सबरीमाला जाएंगे.”
हालांकि एक दिन पहले तृप्ति ने कहा था कि पुलिस ने उन्हें कोई विशेष सुरक्षा मुहैया कराने से इंकार कर दिया था.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि शायद किसी और महिला को सोशल मीडिया पर ऐसे 300 संदेश नहीं मिले होंगे, जिनमें कहा गया हो कि तुम ज़िंदा वापस नहीं लौटोगी.
पुलिस की वेबसाइट पर अब तक क़रीब 800 महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश के लिए अपने नाम रजिस्टर कराए हैं. सभी महिलाओं की उम्र 50 से कम है.
मुख्यमंत्री की कोशिश नाकाम
आशंकाएं इसलिए भी बढ़ी हैं क्योंकि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विपक्षी दलों, पंडालम शाही परिवार और थांत्री परिवार से गतिरोध तोड़ने की जो बातचीत शुरू की थी, वह नाकाम हो चुकी है.
हालात ही ऐसे हो गए थे कि केरल के मुख्यमंत्री को मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध करने वाले पक्षों से बातचीत करने आना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट 28 सितंबर को दिए अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार के लिए तो तैयार हो गया लेकिन उसने साफ कहा है कि वह आदेश पर रोक नहीं लगा रहा है. इसका मतलब है कि 10 से 50 वर्ष की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाना चाहिए.
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कहा है कि महिलाओं को प्रवेश की इजाज़त होनी चाहिए. हम इस आदेश के ख़िलाफ़ कैसे जा सकते हैं. हम श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हैं, पर हम आदेश को लागू करने के लिए बाध्य हैं. हम अदालत के फ़ैसले को कमज़ोर नहीं करना चाहते हैं लेकिन हम सबरीमला में हिंसा भी नहीं चाहते हैं.”
भाजपा-कांग्रेस का एक जैसा रुख़
इससे पहले केरल विधानसभा के नेता विपक्ष कांग्रेस नेता रमेश चेन्निताला और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्रीधरन पिल्लई ने मुख्यमंत्री को ‘अड़ियल’ बताते हुए विधानसभा से वॉक आउट कर दिया था.
चेन्निताला ने कहा था, “सरकार ने श्रद्धालुओं की भावनाओं की अनदेखी की है. मुख्यमंत्री का रवैया अड़ियल है. हमने सलाह दी थी कि शांति बनाए रखने के लिए सरकार को 22 जनवरी तक इंतज़ार करना चाहिए जब सुप्रीम कोर्ट इस फ़ैसले पर पुनर्विचार करने वाला है.”
भाजपा के श्रीधरन पिल्लई ने भी मुख्यमंत्री पर घमंडी रुख़ से बात करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “वो कम्युनिस्ट विचारधारा को थोपने की कोशिश कर रहे हैं. हम हड़ताल पर फ़ैसला लेंगे.”
अक्टूबर के महीने में कई महिलाओं ने सबरीमला में प्रवेश करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें श्रद्धालुओं ने आगे नहीं जाने दिया था. पिल्लई ने बाद में दावा किया था कि वे श्रद्धालु संघ परिवार के सदस्य थे. कम से कम दो महिलाओं ने पुलिस सुरक्षा में वहां जाने की कोशिश की थी, लेकिन वे भी प्रवेश नहीं कर पाईं.
-BBC

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