सबरीमाला विवाद: रिव्‍यू पिटीशन पर अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद

नई दिल्‍ली। केरल के सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ दायर रिव्यू पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई।
चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि यह सुनवाई सबरीमला मामले में कोर्ट के फैसले के पुनर्विचार पर नहीं हो रही है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब तीन हफ्ते बाद होगी। सबरीमाला मामले में 5 जजों की बेंच ने जिन मुद्दों को सुनवाई के लिए भेजा था, उस पर सुनवाई होगी।
बता दें कि 5 जजों की बेंच ने कहा था कि अलग-अलग धर्मों में धार्मिक रीति रिवाजों पर महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव के मामले में कोर्ट दखल दे सकता है या नहीं, इस पर विचार करने की जरूरत है। चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली 9 सदस्यीय पीठ 60 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इस मामले पर अगली सुनवाई का समय 3 हफ्ते बाद रखा गया है।
CJI ने कहा, ‘बड़े मुद्दों पर सुनवाई करेंगे।’
सीजेआई ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि इस मामले की सुनवाई में अधिक समय खराब हो इसलिए मामले में टाइम लाइन तय करना चाहते हैं। सभी वकील आपस में तय करके बताएं कि जिरह और दलीलों में कितना समय लेगा।’
चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि वह बड़े मुद्दों को सुनेंगे महिलाओं का मंदिर, मस्जिद, पारसी धर्म के अगियारी में प्रवेश और साथ ही दाउदी बोहरा समुदाय द्वारा महिला जननांग विकृति करने के मसले पर होगी जो कि पांच न्यायाधीशों वाली बेंच द्वारा संदर्भित बड़ा मुद्दा है।
SC के सेक्रेटरी जनरल वकीलों से मिलकर टाइमफ्रेम तय करेंगे
चीफ जस्टिस बोबड़े ने कहा कि इस मामले पर आगे की सुनवाई किन सवालों पर होगी, कौन वकील किस मुद्दे पर बहस करेगा, इसके लिये सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल सभी वकीलों से मीटिंग कर एक टाइम फ्रेम तय करेंगे।
कोर्ट ने सभी पक्षकारों को यह तय करने के लिए कि किन किन मुद्दों पर सुनवाई होगी, तीन हफ्ते का समय दिया है।
17 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल इस मामले से जुड़े सभी वकीलों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में तय होगा कि किस मुद्दे पर कौन वकील दलील देगा।
9 जजों की बेंच ने की सुनवाई
इस मुद्दे पर सोमवार को सुनवाई के लिए बेंच में जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एल. नागेश्वर राव, जस्टिस एम. एम. शांतनगौडर, जस्टिस एस. ए. नजीर, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी, जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हुए। इनमें पहले की बेंच का कोई जज नहीं हैं। शीर्ष न्यायालय ने 2018 के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करने वाली याचिकाओं के समूह को सूचीबद्ध करने के बारे में सूचना देते हुए 6 जनवरी को एक नोटिस जारी किया था।
महिलाओं को मिली थी प्रवेश की इजाजत
28 सितंबर 2018 को एक संवैधानिक बेंच ने 10 साल से 50 साल के बीच की उम्र की महिलाओं को सबरीमाला के भगवान अयप्पा के मंदिर में नहीं जाने देने की परंपरा को असंवैधानिक बताया था और सभी महिलाओं के लिए मंदिर के दरवाजे खोल दिए थे। इसके बाद 50 से भी ज्यादा पुनर्विचार याचिकाएं इस फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थीं। तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की एक पीठ द्वारा इस विषय में 3:2 से बहुमत का फैसला सुनाए जाने के बाद नौ सदस्यीय पीठ का गठन किया गया।
मस्जिदों, मंदिरों में एंट्री पर भी फैसला
गौर करने वाली बात यह है कि बेंच का जो भी फैसला होगा वह सिर्फ सबरीमाला केस के लिए नहीं बल्कि मस्जिदों में महिलाओं की एंट्री, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं में खतना और पारसियों के फायर टेंपल्स में महिलाओं की एंट्री पर भी होगा। यह इसलिए इतना अहम होगा क्योंकि सभी धर्मों में लैंगिक समानता को स्थापित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
-एजेंसियां

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